
नेपाल सरकार के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रुड़की स्थित राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआइएच) का दौरा किया। उन्होंने जल विज्ञान, मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन पर चर्चा की।
एनआइएच निदेशक डॉ. वाईआरएस राव ने नेपाल की जल संबंधी चुनौतियों और संस्थान की क्षमताओं पर प्रकाश डाला।
प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न प्रयोगशालाओं और वर्षा जल संचयन प्रणाली का अवलोकन किया, जिससे सतत जल संसाधन प्रबंधन पर मूल्यवान दृष्टिकोण मिले।
रुड़की। नेपाल सरकार के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जल विज्ञान, मौसम विज्ञान एवं आपदा प्रबंधन के अंतर्गत बुधवार को राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआइएच) रुड़की का दौरा किया।
इस प्रतिनिधिमंडल में आपदा प्रबंधन में सहयोग करने वाले नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण आदि के सदस्य शामिल रहे।
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के निदेशक डा. वाईआरएस राव ने प्रतिनिधिमंडल से नेपाल की जल संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की। साथ ही एनआइएच की क्षमताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक विज्ञानी जल संबंधी समस्याओं के समाधान और जल क्षेत्र में क्षमता निर्माण में संलग्न हैं।
वहीं संस्थान के जल संसाधन प्रणाली प्रभाग के प्रमुख डा. एआर सेंथिल कुमार ने आइआइटी रुड़की के जल विज्ञान विभाग में एनआइएच की परियोजनाओं पर जानकारी दी और जल संसाधन प्रबंधन में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के माध्यम से अनुसंधान और क्षमता निर्माण पर भी प्रकाश डाला। तकनीकी प्रकोष्ठ एवं जल वैज्ञानिक उपकरण प्रयोगशाला के प्रभारी डा. संतोष पिंगले ने एनआइएच की प्रयोगशाला सुविधाओं का परिचय कराया। प्रयोगशाला में उपलब्ध विभिन्न फील्ड उपकरणों और उनके उपयोगों की जानकारी दी।
प्रतिनिधियों ने एनआइएच परिसर में लागू वर्षा जल संचयन प्रणाली का अवलोकन किया। सत्य प्रकाश (एमटीएस-टी) ने फील्ड उपकरणों जैसे-ईआरटी सर्वे मीटर (भूमिगत मानचित्रण के लिए), डीजीपीएस (टोपोग्राफिक सर्वे के लिए), इको साउंडर (बाथीमेट्री के लिए) एवं भूजल स्तर सूचक का प्रदर्शन किया।
न्यूक्लियर हाइड्रोलाजी लैब के प्रभारी डा. गोपाल कृष्णन ने स्थिर समस्थानिकों के मापन एवं भूजल डेटिंग के उपकरणों का प्रदर्शन किया और सतही एवं भूजल संसाधन आकलन में इन तकनीकों के अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला।
मृदा जल प्रयोगशाला के प्रभारी-ए डा. सत्येन्द्र कुमार ने मृदा विश्लेषण तकनीकों का प्रदर्शन किया। जल गुणवत्ता प्रयोगशाला के प्रभारी डा. विनय त्यागी एवं प्रभारी-ए डा. कालजंग ने जल गुणवत्ता आकलन में प्रयुक्त विभिन्न उपकरणों और उनकी भूमिका समझाई।
हाइड्रोमेट आब्जर्वेटरी के प्रभारी डा. रविन्द्र काले ने मौसम संबंधी मानकों को मापने वाले हाइड्रोमौसम विज्ञान उपकरणों पर प्रकाश डाला। प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई संवादात्मक चर्चाओं एवं प्रयोगशाला भ्रमण ने सतत जल संसाधन प्रबंधन पर मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान किए। इस मौके पर समन्वयक विज्ञानी राजेश अग्रवाल, पवन कुमार, दीपक गुप्ता आदि उपस्थित रहे।







