Big Breaking:-सामाजिक समारोहों में असहज महसूस करते हैं 32.5% युवा, AIIMS ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल सर्वे में खुलासा

एम्स ऋषिकेश के एक सर्वे में सामने आया है कि 47.8% युवा अपनी बातों को महत्वहीन मानते हैं, जबकि 32.5% सामाजिक समारोहों में असहज महसूस करते हैं।

ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के एक सर्वे में निकाले गए निष्कर्ष में 47.8 प्रतिशत युवाओं को लगता है कि उनकी बातों और विचारों को महत्व नहीं दिया जाता।

वहीं 32.5 प्रतिशत युवा सामाजिक समारोहों में असहज महसूस करते हैं। एम्म ने सर्वे में ऋषिकेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में 15-26 वर्ष आयु वर्ग के 418 युवाओं को शामिल किया।

एम्स के सोशल आउटरीच सेल के डा. संतोष ने बताया कि इस सर्वे में भावनात्मक स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक दबाव को लेकर यह डेटा सामने आया है। सर्वे में 23.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बार-बार चिंता या घबराहट अनुभव करने की बात कही है।

10.8 प्रतिशत शैक्षणिक अपेक्षाओं के बोझ से दबाव महसूस करते हैं।31.8 प्रतिशत युवाओं ने आत्म-क्षति जैसे विचार आने की जानकारी दी। वहीं 4.3 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि आत्महत्या करने के विचार भी उन्हें आए हैं।

इसके अलावा, 45.7 प्रतिशत युवाओं ने परिवार या करीबी लोगों के साथ बार-बार गलतफहमियों की बात कही, जो भावनात्मक संतुलन की कमी को दर्शाता है। जो युवा लगातार चिंता में रहते हैं, उनमें यह जोखिम लगभग पांच गुना अधिक पाया गया। वहीं 12.2 प्रतिशत युवाओं के पास कोई करीबी मित्र नहीं है।

51.9 प्रतिशत ने माना डिजिटल तकनीक डाल रही बाधा

डिजिटल उपयोग एवं बौद्धिक स्वास्थ्य को लेकर किए गए सर्वे में 28.7 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि प्रतिदिन चार घंटे से अधिक गैर-शैक्षणिक स्क्रीन समय बिताते हैं।

51.9 प्रतिशत ने माना कि डिजिटल तकनीक उनकी दिनचर्या और पढ़ाई में बाधा डालती है। नेतृत्व एवं समग्र विकास अध्ययन में पाया गया कि 61.2 प्रतिशत युवाओं में जीवन का स्पष्ट उद्देश्य था।

62 प्रतिशत युवा ही पर्याप्त नींद लेते पाते हैं और 50.5 प्रतिशत नियमित व्यायाम करते हैं। मात्र 19.6 प्रतिशत युवा ही पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करते हैं।

नेशनल यूथ कान्क्लेव में करेंगे मंथन

डॉ. संतोष का कहना है कि यह अध्ययन बताता है कि युवाओं की समस्याओं को अलग-अलग देखने की बजाए समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

इसी को लेकर 25 मार्च को एम्स में नेशनल यूथ कान्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विशेषज्ञों, शिक्षकों और युवाओं को एक साथ लाकर इन चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।

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