
मसूरी में त्यूणी-चकराता-मसूरी-बाटाघाट राजमार्ग पर अवैध खनन और निर्माण मानकों की अनदेखी के कारण पुश्ता क्षतिग्रस्त हो गया। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि भवन स्वामियों ने आवासीय नक्शे के बजाय होटल का निर्माण किया और राजमार्ग से तय 4.82 मीटर की दूरी का पालन नहीं किया। यदि नियमों का पालन होता तो राजमार्ग को क्षति नहीं पहुँचती। कागजों पर नियम पूरे किए गए, लेकिन धरातल पर संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया गया।
देहरादून। मसूरी में त्यूणी-चकराता-मसूरी-बाटाघाट राजमार्ग पर जिस भूमि पर निर्माण के दौरान किए गए अवैध खनन से पुश्ता क्षतिग्रस्त हुआ, उसमें बड़े स्तर पर मानकों की अनदेखी पाई गई।
जिला प्रशासन की संयुक्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, भवन स्वामियों ने 349.50 वर्गमीटर भूमि पर आवासीय नक्शा पास कराया था। लेकिन, मौके पर प्रथम दृष्टया होटल का निर्माण पाया गया।
निर्माण के लिए कुल 420.66 वर्गमीटर के नक्शे की स्वीकृति दी गई थी। शर्त यह थी कि निर्माण राजमार्ग के किनारे से 4.82 मीटर की दूरी पर किया जाएगा। यानी इतनी दूरी तक किसी तरह के निर्माण की मनाही होगी।
बावजूद इसके भूस्वामियों ने राजमार्ग के किनारे पर ही जेसीबी/एक्सकेवेटर से ताबड़तोड़ खोदाई करते हुए अवैध खनन कर दिया। यदि निर्माण तय दूरी पर किया जाता तो राजमार्ग के पुश्ते को क्षति नहीं पहुंचती।
कागजों में भरा जाता है नियमों का पेट
राजधानी दून से लेकर मसूरी तक तमाम निर्माणों में कागजों का पेट भरपूर भरा जाता है। लेकिन, धरातल पर उसका पालन नहीं किया जाता।
जिस निर्माण से मसूरी में राजमार्ग का पुस्ता ढहा, उसमें भी सभी नियम पूरे करने के बाद नक्शा पास किया गया। कहने को राष्ट्रीय राजमार्ग, नगर पालिका मसूरी, जल संस्थान और मसूरी वन प्रभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग से भी भूगर्भीय आख्या ली गई।
दूसरी तरफ नियम पूरे करने के लिए जियो टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट और स्ट्रक्चरल ड्राइंग की औपचारिकता भी की गई। ताकि मसूरी क्षेत्र की संवेदनशीलता के बीच निर्माण की अनुमति ली जा सके।
हालांकि, जब धरातल पर निर्माण की बारी आई तो उस संवेदनशीलता की चिंता को सिर्फ कागजों तक सीमित रखा गया।









