
पुरोला के ढाटमीर गांव में आजादी के 79 साल बाद पहली बार बस पहुंची, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। मोरी विकासखंड की हरकीदून घाटी में स्थित इस गांव तक सड़क पहुंचने से अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे।
पीएमजीएसवाई के तहत 12 करोड़ की लागत से 16 किमी सड़क का निर्माण हुआ है, जिससे 32 किमी पैदल चलने की मजबूरी खत्म हुई।
पुरोला। मोरी विकासखंड की बडासु पट्टी के सुदूरवर्ती हरकीदून घाटी के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा। आजादी के 79 वर्षों बाद पहली बार ढाटमीर गांव तक बस पहुंची तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोग खुशी से झूम उठे और उन्होंने बस का स्वागत किया।
बडासु पट्टी के अंतर्गत तालुका, गंगाड़ पवाणी, ढाटमीर और ओसला गांव हरकीदून घाटी में स्थित हैं। यह संपूर्ण क्षेत्र गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है।
इन गांवों में लगभग 653 परिवारों की करीब आठ हजार की आबादी रहती है। अब तक सांकरी से आगे लगभग आठ किमी तक ही तालुका तक गोविंद पशु विहार वन मार्ग हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए था।
हरकीदून घाटी के चारों गांव (ओसला, गंगाड़ एवं पवाणी और ढाटमीर) तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को लगभग 32 किमी पैदल सफर करना पड़ता था। मरीजों, बुजुर्गों और छात्रों के लिए यह रास्ता बेहद कठिन और जोखिम भरा था।
ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को देखते हुए पांच वर्ष पहले सांकरी से आगे इन गांवों को सड़क से जोड़ने का कार्य प्रारंभ किया गया। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत करीब 12 करोड़ की लागत से 16 किमी सड़क निर्माण किया गया। गंगाड़, ओसला गांव तक पुल का निर्माण छोड़कर कटिंग कार्य पूर्ण होने को है।
नववर्ष पर पहली बार 22 सीटर बस ढाडमीर गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने आजादी के बाद इसे सबसे बड़ा तोहफा बताया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पहुंचने से अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे।
वहीं, क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता विजय राणा व सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सड़क की कटिंग मानक के अनुरूप नहीं है तथा 42 सीटर बस का ट्रायल होना था। 22 सीटर बस ही ट्रायल को ढाटमीर तक पहुंची। लोगों ने मानक के अनुरूप कटिंग न होने को लेकर आक्रोश भी जताया है।
अभी ढाटमीर आदि गांवों के पास पुलों का काम हो रहा है। हलारा खड-पूर्ति गाड़ में स्कबर व काजवे का निर्माण कार्य होना है, जिस कारण बड़ी बस का ट्रायल संभव नहीं है और 22 सीटर बस ही ढाटमीर तक पहुंच पाई है।
-सुभाष दोरियाल, सहायक अभियंता पीएमजीएसवाइ पुरोला









