Big Breaking:-जीते जी साथ नहीं रहना चाहती थी अंजलि, सुहाग उजड़ा तो दौड़ी चली आई

हल्द्वानी में रवि गुप्ता की ट्रेन दुर्घटना में मौत के बाद उनकी पत्नी अंजलि गुप्ता अपने मायके से बेटे अभिमन्यु के साथ पति के शव को लेकर घर लौटी हैं। रवि उन्हें वापस लाने दिल्ली गए थे,

लेकिन ससुराल पक्ष ने उन्हें बेटे से अलग कर दिया। घर लौटते समय रवि की मौत हो गई। अब अंजलि और बेटा गुमसुम हैं, जिससे उनके पछतावे का आभास होता है।

हल्द्वानी। जीते जी जिस पति के साथ पत्नी अंजलि गुप्ता साथ नहीं रहना चाहती थी। अब वो ही उसकी मौत के बाद अपने मायके से पति के शव के साथ घर लौट आई है। साथ ही रवि गुप्ता का आठ साल का बेटा भी अपने दादा-दादी के घर आ गया है। अब मां-बेटे दोनों घर में गुमशुम बैठे हैं।

चार जनवरी को घर से निकलते वक्त मृतक रवि गुप्ता ने अपनी मां मुन्नी गुप्ता से कहा कि मम्मी मैं मन्नू (अभिमन्यु) को इसकी मां से मिलवाने ले जा रहा हूं। क्या पता अभिमन्यु को देखकर वह घर आने का मन बना ले।

ऐसा कहकर वह दिल्ली चला गया। लेकिन महिला हेल्पलाइन केंद्र में रवि गुप्ता को उसके बेटे से अलग करते हुए अंजली का भाई उसे अपने घर ले गया।

रवि दोनों को घर लाना चाहता था लेकिन ससुराल पक्ष वालों ने दोनों मां-बेटे को उसके साथ नहीं आने दिया। अपनी मां मुन्नी देवी के कहने पर रवि वापस अपने दोस्त के साथ घर आ रहा था। लेकिन उनकी ट्रेन से टकराकर मौत हो गई।

सूचना मिलने पर अंजलि पति के शव के साथ वापस हल्द्वानी घर लौट आई है। अब शुक्रवार को वह पूरे दिन रवि गुप्ता की फोटो के आगे अपने बेटे अभिमन्यु के साथ बैठी रही।देखकर ऐसा लगा कि अब अंजलि को पछतावा हो रहा है।

महिला समाधान केंद्र में केस की सुनवाई के बाद साढ़े पांच बजे किया मां को फोन


पांच जनवरी को महिला समाधान केंद्र में केस की सुनवाई के बाद साढ़े पांच बजे ही रवि ने अपनी मां मुन्नी गुप्ता को फोन किया। उन्हें बताया कि पत्नी अंजली का भाई मन्नू (अभिमन्यु) को अपने साथ लेकर चला गया है।

तब मां मुन्नी ने रवि को कहा कि बेटा तू चिंता मत कर घर आ जा। सब ठीक हो जाएगा, कुछ दिनों में दोबारा दोनों को घर ले आना। सब ठीक हो जाएगा। उसी के डेढ़ घंटे बाद रवि गुप्ता की लाश ससुराल से आगे रेलवे ट्रेक में पड़ी मिली।

अभिमन्यु की चल रही हैं स्कूल की छुट्टियां, पिता की मौत के बाद गुमसुम है बेटा


आठ साल का अभिमन्यु कक्षा तीन का छात्र है। वह पास के ही एक निजी स्कूल में पढ़ाई करता है। उसके स्कूल की सर्दियों की छुट्टियां चल रहीं थी। वह अपने पिता के साथ हंसता-खेलता दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। लेकिन अब पिता के शव के साथ वह गुमसुम चेहरे के साथ वापस आया है। उसे अपने पिता के जाने का काफी गम है।

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