Big Breaking:-संभलकर रहें…शाम छह से रात 12 बजे सड़क हादसों में जा रहीं सबसे ज्यादा जानें

बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक का बुधवार को कार्यवृत्त जारी हो गया। इसमें साल 2026 में परिवहन और पुलिस विभाग के संकल्प और लक्ष्य भी सामने आए हैं।

उत्तराखंड की सड़कों पर शाम के छह बजे से रात के 12 बजे के बीच सबसे ज्यादा लोगों की हादसों में मौत हो रही है। परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा एजेंसी अब इस दिशा में काम करेगा। वहीं, 8000 किमी में से 2000 किमी सड़कों पर मार्च 2026 तक क्रैश बैरियर लगेंगे।

बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक का बुधवार को कार्यवृत्त जारी हो गया। इसमें साल 2026 में परिवहन और पुलिस विभाग के संकल्प और लक्ष्य भी सामने आए हैं।

वहीं, चौंकाने वाला तथ्य ये है कि उत्तराखंड में अप्रैल, मई, जून, जुलाई और दिसंबर के महीनों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं। समयवार देखें तो साल 2025 में शाम को छह बजे से रात नौ बजे के बीच 279 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 187 लोगों की मौत हुई। वहीं, रात को नौ बजे से 12 बजे के बीच 230 दुर्घटनाओं में 165 लोगों की मौत हुई।

प्रदेश में कक्षा-नौ के लिए आपदा प्रबंधन की नई पुस्तक में सड़क सुरक्षा और यातायात नियम को शामिल किया गया है। वहीं, एससीईआरटी की ओर से विकसित की जा रही कक्षा एक व दो के बच्चों के लिए भी सड़क सुरक्षा संबंधी पाठ्य सामग्री शामिल की जा रही है।

सीएम धामी ने सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों के तहत सड़क सुरक्षा सुधार कार्यों जैसे ब्लैक स्पॉट, सड़क सुरक्षा ऑडिट, यातायात उपाय, रोड साइन, रोड मार्किंग के काम समयसारिणी के हिसाब से करने को कहा।

मार्च 26 तक 2500 किमी सड़कों पर लगेंगे क्रैश बैरियर


बैठक में मुख्यमंत्री ने सड़कों पर सुरक्षा को लेकर क्रैश बैरियर की भी समीक्षा की। प्रदेश में 8258.16 किमी सड़कों पर क्रैश बैरियर लगाए जाने थे, जिनमें से 5683.29 किमी पर लगाए जा चुके हैं।

बाकी 2574.87 किमी सड़कों पर मुख्यमंत्री धामी ने मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए हैं।

11 ब्लैक स्पॉट ऐसे, जहां हो चुकीं 11 मौतें


प्रदेश में बीते तीन वर्षों में 11 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं, जहां हादसों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 46 ऐसे हैं, जहां तीन साल से कोई दुर्घटना नहीं हुई। इन सभी को हटाया जाएगा।

इसके अलावा प्रदेश में एक दुर्घटना वाले 23, दो दुर्घटना वाले 24, तीन से पांच दुर्घटना वाले 49, छह से 10 दुर्घटना वाले 129, 11 से अधिक दुर्घटना वाले आठ ब्लैक स्पॉट हैं।

मौतों के नजरिए से देखें तो ऐसे ब्लैक स्पॉट जहां दुर्घटनाएं तो हुईं लेकिन कोई मृत्यु नहीं हुई 17, एक मृतक वाले 33, दो मृतक वाले 15, तीन से पांच मृतक वाले 35, छह से 10 मृतक वाले 22, 11 से अधिक मृतक वाले 11 ब्लैक स्पॉट हैं। सभी सड़कों पर ब्लैक स्पॉट का दोबारा चिह्निकरण किया जाएगा।

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