
भीमताल झील पर बने 138 साल पुराने डैम की एक करोड़ की लागत से मरम्मत की जा रही है। हालांकि, इसकी उम्र पूरी होने के कारण अब इसे नया बनाने की जरूरत महसूस हो रही है।
नैनीताल। कुमाऊ की सबसे बड़ी प्राकृतिक भीमताल झील पर बने डैम की सुरक्षा के लिए भले ही एक करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार कार्य किये जा रहे है। लेकिन 138 वर्ष की आयु पूरी कर चुके डैम को मरम्मत कार्य नहीं, बल्कि नया बनाने की जरुरत महसूस होने लगी है।
सिंचाई विभाग ने झील के मुहाने पर नये डैम बनाने से पूर्व विशेषज्ञों द्वारा सर्वे कर डीपीआर निर्माण को लेकर कवायद शुरु की है। जिसके लिए 1.28 करोड़ का प्रस्ताव शासन भेजा गया है। कवायद सफल रही तो भीमताल झील पर डैम का पुर्ननिर्माण किया जाएगा।
1888 में भीमताल डैम का निर्माण किया गया था
बता दे कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1888 में भीमताल डैम का निर्माण किया गया था। 16.16 मीटर ऊचे व 137 मीटर लंबे डैम की निर्माण के समय आयु करीब 100 वर्ष आंकी गई थी। लेकिन 138 वर्ष पुराना हो चुका डैम कई जगह से क्षतिग्रस्त होने लगा था।
जिससे उसमें दरारे उभरने व पानी का रिसाव होने से खतरा बना हुआ था। पूर्व में विशेषज्ञ संस्थानों व वैज्ञानिकों के सर्वे के बाद करीब एक करोड़ की लागत से डैम का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के सभी जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरे हो चुके है
सहायक अभियंता मनमोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि पूर्व में बनाये गए प्रोजेक्ट के सभी जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरे हो चुके है। लेकिन पुराने हो चुके डैम में यह महज रोकथाम कार्य है। 138 वर्ष पूरे कर चुके डैम को नया बनाने की जरुरत है। नया डैम बनाने के से पूर्व विभिन्न पहलुओं का अध्ययन के बाद ही डीपीआर तैयार की जाती है। अध्ययन व डीपीआर निर्माण को 1.28 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन भेजा गया है।
अगले माह स्टेट डैम सेफ्टी आर्गेनाइजेशन के विशेषज्ञ करेंगे निरीक्षण
मनमोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि अगले माह स्टेट डैम सेफ्टी आर्गेनाइजेशन के विशेषज्ञ भीमताल डैम का निरीक्षण करेंगे। जिसमें आईआईटी रुड़की, सीडब्लूसी समेत देश के विभिन्न डैम में काम कर चुके विशेषज्ञ शामिल रहते है। विशेषज्ञ डैम में पड़ी दरारों की रोकथाम के लिए किये गए कार्यों की जांच करेंगे। साथ ही नये डैम निर्माण को लेकर भी विशेषज्ञ अध्ययन कर अपने सुझाव देंगे।
लगा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, निकासी गेट लगने बाकी
मनमोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि एक करोड़ के प्रोजेक्ट में डैम में पड़ी दरारों से हो रहे पानी के रिसाव की रोकथाम सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रोजेक्ट में डैम का जियोफिजिकल, डायनेमिक समेत अन्य अध्ययन कराये गए। जिसके बाद दरारों को भरने का काम किया गया। दरार भरने के बाद अब पानी का रिसाव थम गया है।
मनमोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत डैम में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भी स्थापित किया गया है। जो जलस्तर बढ़ने पर अलर्ट देगा। बताया कि एक करोड़ के प्रोजेक्ट में सभी सुरक्षा कार्य पूरे कर लिए गए है। डैम में नये निकासी गेट स्थापित किये जाने है। जिनको अगले माह लगा दिया जाएगा।









