Big Breaking:-उत्तराखंड में ई-डिटेक्शन प्रणाली का शुभारंभ, अब बिना रोके कटेगा चालान

देहरादून। उत्तराखंड में सड़क परिवहन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में ई-डिटेक्शन (e-Detection) प्रणाली को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

यह उन्नत डिजिटल तकनीक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सड़क पर चल रहे वाहनों के दस्तावेजों और यातायात नियमों की निगरानी करेगी।


यह प्रणाली मुख्य रूप से चार चरणों में कार्य करेगी—
पहले चरण में टोल प्लाजा पर गुजरने वाले वाहनों का डेटा FASTag के माध्यम से कैप्चर किया जाएगा।

दूसरे चरण में वाहन का विवरण भारत सरकार के ‘वाहन (Vahan)’ पोर्टल से रियल टाइम में मिलान किया जाएगा, जिसमें परमिट, बीमा प्रमाण पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) और फिटनेस सर्टिफिकेट शामिल हैं।


यदि किसी वाहन के दस्तावेज अपूर्ण या अमान्य पाए जाते हैं, तो तीसरे चरण में उसे उल्लंघन के रूप में चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में सिस्टम स्वतः ई-चालान जनरेट करेगा,

जिसकी सूचना वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भेजी जाएगी। चालान में उल्लंघन का विवरण और भुगतान के लिए डिजिटल लिंक उपलब्ध रहेगा।


वाहन स्वामी Parivahan Seva पोर्टल अथवा https://echallan.parivahan.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे।
इस प्रणाली से सड़क पर वाहनों को रोककर जांच करने की आवश्यकता नहीं रहेगी, जिससे ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था में कमी आएगी।

साथ ही मानवीय त्रुटियों और अनियमितताओं की संभावना भी समाप्त होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वैध दस्तावेज वाले वाहन ही सड़कों पर चलें, जिससे दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।


देश के ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में यह प्रणाली पहले से लागू है। 7-8 जनवरी 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में सभी राज्यों को इसे अपनाने के निर्देश दिए गए थे।


उत्तराखंड में 19 जनवरी 2026 से इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। पहले चरण में जिन टोल प्लाजा पर यह प्रणाली शुरू होगी, उनमें—
बहादराबाद टोल प्लाजा, हरिद्वार
भगवानपुर टोल प्लाजा, हरिद्वार
लच्छीवाला टोल प्लाजा, देहरादून
जनता पुर पट्टी टोल प्लाजा, उधमसिंह नगर
बगड़ी टोल प्लाजा, उधमसिंह नगर
नगला टोल प्लाजा, उधमसिंह नगर
देवरिया टोल प्लाजा, उधमसिंह नगर
शामिल हैं।


17 जनवरी 2026 को किए गए मॉक ड्रिल परीक्षण में 49,060 वाहनों का डेटा प्राप्त हुआ, जिनमें से 1,569 वाहनों में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं।

परीक्षण सफल रहने के बाद 19 जनवरी से इसे ऑटो मोड में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
ई-डिटेक्शन प्रणाली के लागू होने से उत्तराखंड में यातायात व्यवस्था अधिक अनुशासित, सुरक्षित और तकनीक आधारित होगी।

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