Big Breaking:-आर्थिक सर्वेक्षण: उत्तराखंड में औद्योगिक विकास ने पकड़ी रफ्तार, खुले रोजगार के द्वार

उत्तराखंड में औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।

देहरादून। प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी तेजी से सृजित हो रहे हैं। राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के विस्तार ने आर्थिकी को मजबूती देने के साथ युवाओं के लिए नौकरी के द्वार भी खोले हैं।

राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में प्रदेश में मात्र 14,591 एमएसएमई इकाइयां कार्यरत थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 3,81,889 तक पहुंच चुकी है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था में करीब 13 प्रतिशत योगदान अकेले एमएसएमई सेक्टर का है।

बीते तीन वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी देखने को मिली है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच राज्य में 19,595 नई एमएसएमई इकाइयों की स्थापना हुई। इन इकाइयों में 2,296.33 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जिससे 1,12,683 लोगों को रोजगार मिला।

निर्वाद विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन सुविधा से उद्यमी आकर्षित

औद्योगिक विकास के लिए प्रदेश में बेहतर विद्युत आपूर्ति, परिवहन सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और उद्योगों को स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं ने निवेशकों को आकर्षित किया है। इससे छोटे उद्योगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

राज्य गठन के समय एमएसएमई क्षेत्र में कुल निवेश 700.29 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16,930.71 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में औद्योगिक ढांचा मजबूत हुआ है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।

बड़े उद्योगों में भी बढ़ा निवेश

प्रदेश सरकार ने एमएसएमई के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी आकर्षित करने के लिए औद्योगिक नीतियों को सरल बनाया है। सिडकुल के माध्यम से उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराने से बड़े निवेश को भी गति मिली है।

वर्ष 2000 में राज्य में केवल 39 बड़ी औद्योगिक इकाइयां थीं, जिनमें 8,369.78 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 129 हो गई है और इनमें कुल 27,689.2 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है।

एमएसएमई में साढ़े चार लाख से अधिक को रोजगार

औद्योगिक निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसरों में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2000-01 में एमएसएमई इकाइयों में केवल 38,509 लोगों को रोजगार मिला था। अब यह संख्या बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4,56,605 तक पहुंच गई है। इससे प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है।

राज्य में 1750 के पार पहुंचे स्टार्टअप

प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। युवाओं को स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2022 में राज्य में 702 स्टार्टअप पंजीकृत थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 1,750 हो गई है।

यानी तीन वर्षों में इसमें 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार कालेजों, विश्वविद्यालयों, आइटीआइ, पालिटेक्निक, आइआइएम और आइआइटी जैसे संस्थानों में बूट कैंप आयोजित कर युवाओं के नवाचारों को मंच प्रदान कर रही है।

कई चरणों में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्रैंड फिनाले में प्रदेश के दस सर्वश्रेष्ठ नवाचारों को एक-एक लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। औद्योगिक विकास और स्टार्टअप संस्कृति के विस्तार से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में राज्य में निवेश और रोजगार दोनों के नए अवसर और अधिक बढ़ेंगे।

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