
उच्च न्यायालय ने मसूरी में सड़क और खेल मैदान के निर्माण के लिए बांज के पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ काटे जाने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की।
नैनीताल। हाई कोर्ट ने बिना वन विभाग की अनुमति के मसूरी नगर पालिका की ओर से एमपीजी कालेज की भूमि पर सड़क निर्माण, खेल मैदान बनाने के लिए बांज के पेड़ काटे जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट ने नगर पालिका को झटका देते हुए वहां किसी भी तरह के पेड़ कटान पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा कि किसकी अनुमति से पेड़ काटे जा रहे है। कोर्ट ने नगर पालिका, राज्य सरकार और वन विभाग से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में एमपीजी कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष व पर्यावरण प्रेमी प्रवेश राणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि मसूरी में निजी भूमि पर बांज सहित कई बहुमूल्य पेड़ हैं।
हर साल पेड़ों की देख रेख नामी गिरामी विद्यालय करते आये हैं और पेड़ लगाए जाते है। उन्ही में से एक एमपीजी कालेज दो एकड़ भूमि पर फैला है। कालेज के हास्टल की भूमि पर नगर पालिका की ओर से खेल मैदान और सड़क का निर्माण करने के लिए निविदा निकाल कर बांज के पेड़ बिना वन विभाग की अनुमति के काट दिए जबकि बांज के पेड़ों की सुरक्षा के बने 1948 के एक्ट के अनुसार पेड़ काटने के लिए अनुमति आवश्यक है।
16 मार्च को नगर पालिका मसूरी पालिका को प्रत्यावेदन भी दिया लेकिन पालिका ने पत्र को दरकिनार कर दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से काटे गए पेड़ों के फोटोग्राफ भी भी कोर्ट पेश किए। जिसका विरोध करते हुए पालिका की तरफ से कहा गया कि काटे गए पेड़ों की फोटो वहां की नही है।
इसपर वन विभाग की तरफ से कहा गया कि यह फोटो वहींं की है। राज्य सरकार की तरफ से भी कहा गया कि इसके लिए पालिका ने अनुमति नहीं ली गयी। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पेड़ कटान पर रोक लगाते हुए वन विभाग, राज्य सरकार और मसूरी नगर पालिका से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।








