
काशीपुर के चैती मेले में दो साल बाद नखासा (घोड़ा) बाजार की रौनक लौट आई है। पंजाब, राजस्थान और गुजरात से व्यापारी बेहतरीन नस्ल के घोड़े लेकर पहुंचे हैं।
काशीपुर (ऊधम सिंह नगर)। चैती मेले में दो साल बाद फिर नखासा (घोड़ा) बाजार की रौनक लौटी है। नखासा बाजार इस वर्ष घोड़ा प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
उत्तराखंड ही नहीं पंजाब, राजस्थान और गुजरात से भी व्यापारी अपने बेहतरीन नस्ल के घोड़े लेकर यहां पहुंच रहे हैं।
मेले में घोड़ों की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ उनकी चाल, नस्ल और विशेषताओं को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा है।
चैती मेले में राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र से आए व्यापारी मोनिक एवं रणवीर सिंह ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से लगातार यहां घोड़े बेचने आ रहे हैं। मेले में घोड़ों की नस्ल, चाल और काबिलियत के आधार पर दाम तय किए जाते हैं।
यहां घोड़े 50 हजार से 1.5 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत तक बिक रहे हैं। अच्छे घोड़े की कोई निश्चित कीमत नहीं होती।
घोड़ों की रेवाल यानी विशेष चाल को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। यह चाल जितनी बेहतर होती है, घोड़े की कीमत उतनी ही अधिक होती है।
दो वर्ष की उम्र में बिक्री लायक हो जाते हैं घोड़े
मेले में सिंधी और मारवाड़ी नस्ल के घोड़े प्रमुख रूप से देखने को मिल रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, सिंधी घोड़े अपनी खास चाल के लिए जाने जाते हैं। जबकि मारवाड़ी मजबूती और तांगा चलाने के लिए बेहतर माने जाते हैं।
इसके अलावा ‘नुखरा’ नस्ल के घोड़े भी शौकिया तौर पर पाले जाते हैं। आमतौर पर दो साल की उम्र में घोड़े बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। मेले में तीन से पांच वर्ष तक के घोड़े अधिक संख्या में लाए गए हैं।
चैती मेला में झूले, तमाशे व सर्कस समेत नखासा (घोड़ा) बाजार की वजह से रौनक बढ़ी है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष तौर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेला में इस बार और भी अधिक रौनक देखी जा रही है।
अभय प्रताप सिंह, मेला अधिकारी एवं एसडीएम, चैती मेला-काशीपुर









