
उत्तराखंड में कुल 84,42,263 मतदाता हैं, जिनमें से 64,63,099 की बीएलओ मैपिंग हुई है। विभिन्न जिलों में 19,79,164 मतदाता ऐसे हैं, जिन्होंने बीएलओ की लगातार कोशिश, चुनाव आयोग की अपील के बावजूद अभी तक बीएलओ मैपिंग का रुख नहीं किया है।
उत्तराखंड के 19 लाख मतदाताओं पर वोट कटने का खतरा मंडरा रहा है। चुनाव आयोग के लगातार प्रयास के बावजूद यह बीएलओ मैपिंग की प्री-एसआईआर गतिविधि का हिस्सा नहीं बन रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो एसआईआर के दौरान नोटिस जारी होने के बाद इनका वोट कट जाएगा।
प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पूर्व प्री-एसआईआर गतिविधियों के तहत बीएलओ मैपिंग का काम चल रहा है। पहले तो उत्तराखंड के उन मतदाताओं की मैपिंग की गई, जिनके या परिवार के वोट 2003 की उत्तराखंड की मतदाता सूची में थे।
अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने उत्तराखंड में निवास कर रहे उन मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग भी शुरू कर दी है, जिनके वोट 2003 में यूपी या अन्य राज्य में थे। प्रदेश में कुल 84,42,263 मतदाता हैं, जिनमें से काफी कोशिशों के बाद 64,63,099 की बीएलओ मैपिंग हुई है।
विभिन्न जिलों में 19,79,164 मतदाता ऐसे हैं, जिन्होंने बीएलओ की लगातार कोशिश, चुनाव आयोग की अपील के बावजूद अभी तक बीएलओ मैपिंग का रुख नहीं किया है। जल्द ही एसआईआर शुरू हो जाएगा।
इसके बाद सभी मतदाताओं तक बीएलओ के माध्यम से एसआईआर फॉर्म पहुंचाए जाएंगे। जिनकी मैपिंग हो चुकी होगी, उन्हें कोई दस्तावेज नहीं देना। केवल फॉर्म भरकर देना है। जिनकी मैपिंग नहीं होगी, उन्हें 2003 के वोट के दस्तावेज के साथ फॉर्म भरकर देना होगा। नहीं दिया तो एक नोटिस जारी होगा। नोटिस का जवाब न देने पर मतदाता सूची से वोट कट जाएगा।









