Big Breaking:-उत्तराखंड के जिस गांव में लगी थी सोने के जेवर पहनने पर रोक, वहां की महिलाओं ने किया विरोध, पूछा- शराब पर रोक क्यों नहीं?

जौनसार बावर में शादी में फिजूलखर्ची रोकने के लिए ग्रामीणों ने महिलाओं के गहनों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया है। महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं, इसे असमानता बता रही हैं।

उनका कहना है कि सोना निवेश है, जबकि पुरुषों की शराब पर पाबंदी क्यों नहीं? विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सामाजिक फैसलों में हस्तक्षेप से इन्कार किया, जिससे यह मामला बहस का मुद्दा बन गया है।

साहिया। जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में शादी के दौरान बढ़ती फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए ग्रामीणों की ओर से बैठक कर महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले गहनों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया जा रहा है, ताकि समाजहित में दिखावा और आर्थिक बोझ कम हो।

हालांकि, कुछ महिलाओं को इस पर आपत्ति है। वे अब इसके विरोध में मुखर होने लगी हैं। उनका कहना है कि ऐसा निर्णय या पाबंदी महिलाओं पर असमानता थोपता है और पुरुषों की फिजूलखर्ची (जैसे महंगी शराब) पर रोक नहीं लगाता।

जबकि सोना एक निवेश है। ऐसे में इस तरह की पाबंदी शराब पर ही लागू करनी चाहिए। जाहिर है महिलाओं के इस रुख से यह मामला बहस का मुद्दा बन गया है।

पहले जौनसार बावर क्षेत्र में मंगलसूत्र नहीं पहने जाते थे। पहले सोने के जेवर में तुंगल, नाक की फूली, बुलाक, उतरेई, कट्टी व चांदी का सूच व कच पहना जाता था, लेकिन अब पंचायतों के इस फैसले पर महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखनी शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि ग्रामीणों की बैठकों में महिलाओं को सिर्फ तीन गहनें पहनने की ही छूट दी जा रही है। हाल ही में वार्डों के निरीक्षण के दौरान विधायक मुन्ना सिंह चौहान के समक्ष एक महिला ने इस पर सवाल उठाए।

कहा कि महिलाओं के ज्यादा गहने पहनने पर तो प्रतिबंध लगाया जा रहा है, लेकिन पुरुषों के शराब पीने पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है।

समाज में शराब समेत कई कुरीतियां हैं। इनका सीधा असर पूरे परिवार पर पड़ता है, ऐसे में गहनों को ही निशाना बनाना न्याय संगत नहीं है।

इस पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सामाजिक निर्णयों में सीधे हस्तक्षेप करने से बचते हुए कहा कि ऐसे फैसले समाज और पंचायतों को आपसी सहमति से ही लेने चाहिए। विधायक यह कहते हुए आगे बढ़ गए कि पंचायतों द्वारा लिए गए सामाजिक निर्णयों में राजनीतिक दखल उचित नहीं है।

जौनसार बावर क्षेत्र की हर खत व गांव में शादियों के दौरान फिजूल खर्च कम करने चाहिए। शराब, बियर, मिठाई, ड्राईफूट आदि जैसे खर्चों पर प्रतिबंधित लगना चाहिए।

महिलाओं के ज्यादा जेवर पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, जबकि जेवर तो घर की संपत्ति है और महिलाओं की शोभा है।
अतरो देवी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य चंदोऊ।

सबसे ज्यादा आपत्ति महिलाओं के लिए सिर्फ तीन ही जेवर पहनने की इजाजत देने पर है। मंगलसूत्र, नाक की फूली और कान के झुमके या तुंगल।

यदि फिजूलखर्ची रोकनी है तो शादी में शराब, बियर, फलफ्रूट, ड्राईफूट पर प्रतिबंधित होना चाहिए। महिलाओं के जेवर जमापूंजी हैं, जो मुसीबत में काम आते हैं।


अनीता तोमर, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत कोठा तारली।

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