
देहरादून नगर निगम महापौर कोटे के विकास कार्यों में डुप्लीकेसी रोकने के लिए जांच तेज कर रहा है। अब तक छह डुप्लीकेट कार्य टेंडर प्रक्रिया से बाहर किए गए हैं, जबकि अन्य प्रस्तावों की जांच जारी है।
महापौर सौरभ थपलियाल ने सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। इस सप्ताह टेंडर खुलने की संभावना है, साथ ही गड्ढे भरने के पुराने कार्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
देहरादून। महापौर कोटे से शहर में होने वाले विकास कार्यों में किसी भी तरह की डुप्लीकेसी न हो, इसके लिए नगर निगम प्रशासन ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। अब तक डुप्लीकेसी के छह काम सामने आने के बाद उन्हें टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है, जबकि अन्य प्रस्तावों की बारीकी से जांच जारी है।
उधर, वार्डों से नए-नए प्रस्ताव भी आने लगे हैं, जिनमें अधिकांश प्रस्ताव सीमा विस्तार में शामिल नए वार्डों से जुड़े हैं। नगर निगम की ओर से इसी सप्ताह टेंडर खोले जाने के संकेत मिले हैं।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि किसी भी काम का वर्कऑर्डर जारी करने से पहले हर प्रस्ताव को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर परखा जा रहा है। डुप्लीकेसी से जुड़े मामलों को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
इसी क्रम में नगर निगम का लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) अनुभाग पुराने प्रस्तावों की जांच के साथ-साथ नए आए प्रस्तावों को भी रिकॉर्ड में शामिल कर रहा है।
नए प्रस्ताव तभी आगामी टेंडर में जोड़े जाएंगे, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे पहले से किसी अन्य विभाग जैसे एमडीडीए या लोनिवि की ओर से कराए जा चुके कार्यों की श्रेणी में नहीं आते।
महापौर सौरभ थपलियाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया में पूरी जांच सुनिश्चित की जाए और यह साफ हो कि कोई भी काम डुप्लीकेसी में शामिल न हो।
फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है और नगर निगम प्रशासन सभी तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। आगामी आठ जनवरी को टेंडर आवेदन बॉक्स में डाले जाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
गड्ढे भरने के कामों की जांच पर सवाल
शहर में पूर्व में स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। महापौर सौरभ थपलियाल ने पहले प्रत्येक वार्ड में विकास कार्यों के लिए 30-30 लाख रुपये का बजट पास किया था।
इसके बाद वर्षाकाल के दौरान शहर में बने गड्ढों को भरने के लिए हर वार्ड में पांच-पांच लाख रुपये का अतिरिक्त बजट दिया गया।
फिर विकास कार्यों के तहत प्रत्येक वार्ड में 15-15 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए। अब चर्चा इस बात की है कि गड्ढे भरने के लिए स्वीकृत पांच लाख रुपये प्रति वार्ड की राशि क्या वास्तव में पूरी तरह खर्च हुई और जिन स्थानों पर गड्ढे भरे गए,
वहां काम की गुणवत्ता की निगरानी हुई या नहीं। यह भी सवाल उठ रहा है कि इन कार्यों की रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन ने मेयर और नगर आयुक्त को सौंपी या नहीं।









