
कट्टे में रखकर छोड़ा गया था नवजात को, छानबीन में जुटी पुलिस
देहरादून में एक नवजात कट्टे में मिला। नवजात को कचरे के साथ भरकर फेंका गया। पुलिस ने दून हॉस्पिटल के निकु वार्ड में नवजात को भर्ती कराया।
देहरादून शहर में तब एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जब स्थानीय लोगों को कचरे के ढेर में एक नवजात बच्चा पाया गया। बच्चे को तुरंत पुलिस ने सकुशल बरामद किया और गंभीर हालत में Doon Hospital के NICU (निकू वार्ड/नवजात ICU) में भर्ती कराया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चा कचरे के साथ फेंका हुआ था और उसकी हालत गंभीर थी जब तक उसे अस्पताल ले जाया गया। बच्चे की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के बाद उसे NICU में रखा गया है जहाँ डॉक्टरों द्वारा उसकी सुरक्षा और इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।
पुलिस की जांच शुरू
पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
आसपास के सीसीटीवी फुटेज और अस्पतालों/नर्सिंग होम के रिकार्ड की तलाश शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नवजात कहां पैदा हुआ था और इसे किसने फेंका।
पुलिस संभावित माता-पिता की पहचान करने के लिए हॉस्पिटल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। नवजात को Doon Hospital के NICU में भर्ती किया गया है, जहां उसकी सांस की स्थिति, तापमान, पोषण और अन्य चिकित्सीय जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि फिलहाल बच्ची/बच्चे के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और बच्चे की हालत में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
समय-समय पर समाने आ रही दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं
इस तरह की घटनाएं भारत में दुर्भाग्यपूर्ण रूप से समय-समय पर सामने आती रही हैं, जहां नवजात शिशु को अज्ञात रूप से छोड़ दिया जाता है या कचरे में पाया जाता है। जैसे पहले भी देहरादून में मोहकमपुर फ्लाईओवर के नीचे कूड़ेदान में नवजात की लाश मिली थी और पुलिस ने मामले में जांच शुरू की थी।
अन्य राज्यों में भी नवजातों को कचरे में या सड़कों पर फेंक दिया जाना जैसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस और अस्पतालों ने इलाज और पहचान की कोशिश की है।
समाज में गिरते मूल्यों का परिणाम या लोकलाज घोट रहा गला
ये घटनाएं सामाजिक, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा के बड़े मुद्दों की ओर संकेत करती हैं। विशेष रूप से गर्भावस्था, सामाजिक कलंक, आर्थिक कठिनाइयों, और सुरक्षा-नेट के अभाव जैसी समस्याएं जिनके कारण बच्चे को सुरक्षित जगह न मिल पाने के कारण ऐसे कृत्य हो सकते हैं।
इसलिए अधिकारियों की कोशिश रही है कि किसी भी ऐसे मामले में परिवार की पहचान और सहायता, बच्चा सुरक्षित रखने तथा देखभाल, सामाजिक कलंक और मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट और महिला कल्याण और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसे दुखद मामलों को रोका जा सके।









