
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अब सभी पर्चा काउंटरों पर स्कैन एंड शेयर से ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो गया है। इससे मरीजों को लंबी लाइनों से राहत मिलेगी और वे घर बैठे भी पंजीकरण करा सकेंगे।
पहले दिन 500 लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। आभा आईडी बनने से मरीजों का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज कराना आसान होगा।
देहरादून। लंबी लाइनों और कागजी कार्रवाई से छुटकारा पाने के लिए राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल में सभी पर्चा काउंटर पर स्कैन एंड शेयर से पंजीकरण शुरू कर दिया है।
मंगलवार को पहले दिन कर्मचारियों व लोगों को इस प्रक्रिया को समझने में थोड़ा वक्त लगा जिससे काउंटर पर दोपहर तक लंबी लाइन लगी रही। हालांकि इस सुविधा से लोगों आनलाइन पर्चा बनाकर लाइन में ज्यादा देर तक नहीं लगना पड़ेगा।
अस्पताल की ओपीडी की बात करें तो यहां दो हजार से 2200 तक ओपीडी रहती है। अस्पताल में मरीजों का विवरण आनलाइन उपलब्ध रहे, इसके लिए आभा आइडी बनाई जा रही है। मंगलवार को काउंटर पर पर्चा बनाने आए 500 लोगों ने स्कैन एंड शेयर के माध्यम से आनलाइन पर्चा बनाए।
अब तक अस्पताल में आभा आइडी का एक ही काउंटर था। लेकिन, अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल में बार-बार पर्चा बनाने और अपने रिकार्ड लाने से मुक्त करने के लिए सभी काउंटर पर स्कैन एंड शेयर को लागू कर दिया है।
सुबह से ओपीडी में सभी सात काउंटर, प्रथम तल व तृतीय तल के एक-एक काउंटर पर भी मरीजों की आइडी से जनरेट की गई। जिसमें मरीज की सभी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और इलाज की जानकारी इसमें सुरक्षित रहेगी।
चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट ने बताया कि एक बार आइडी बन जाएगी तो मरीजों को इलाज का पूरा विवरण उस पर दर्ज होगा। जब भी मरीज किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाएंगे तो उन्हें केवल अपनी आइडी नंबर बतानी होगी। इससे इलाज का विवरण उपलब्ध हो जाएगा। आइडी बनाने में केवल आधारकार्ड व पंजीकृत मोबाइल नंबर जरूरी है।
जांच में एमसीबी में नहीं मिला बड़ा फाल्ट
देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल में ओपीडी बिल्डिंग के प्रथम तल पर शार्ट सर्किट से एमसीबी वायर जलने और सवा घंटे अंधेरा छाये रहने वाले मामले की अस्पताल प्रशासन ने जांच की। जिसमें पता चला कि किसी भी एमसीबी में बड़ा फाल्ट नहीं आया। लोड़ अधिक होने से शार्ट सर्किट हुआ।
बीते दो जनवरी को सुबह ओपीडी बिल्डिंग के प्रथम तल पर जनरल सर्जरी विभाग के पास शार्ट सर्किट होने से बिजली गुल हो गई थी। इसका सीधा असर सर्जरी, रेडियोलाजी, गायनी विभाग और पर्चा-बिल काउंटर पर पड़ा।
यहां सर्जरी विभाग में लाइन में लगे मरीजों का डाक्टरों ने मोबाइल की रोशनी से इलाज किया। रेडियोलाजी में भी मरीजों के नंबर देरी से आने पर उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी।
चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट ने इस पर जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। जिसमें पता चला कि कहीं भी कोई एमसीबी फाल्ट नहीं हुई।
रेडियोलाजी विभाग में मशीनों के लोड के चलते वायर जल गई। उन्होंने बताया कि वह खुद भी विभिन्न विभागों में जाकर निरीक्षण करेंगे कि कहीं हीटर चलते से लोड़ अधिक हो रहा है।









