Big Breaking:-केदारनाथ में -10°C पर भी जारी है पुनर्निर्माण कार्य, पिछले वर्ष इस समय तक जम चुकी थी चार फीट बर्फ

केदारनाथ में कड़ाके की ठंड और -10 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद पुनर्निर्माण कार्य जारी है। इस बार जनवरी में भी बर्फबारी न होने से श्रमिक काम में जुटे हैं, जबकि पिछले साल तक भारी बर्फ जम जाती थी।

वैज्ञानिक इसे मौसम के पैटर्न में बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने का परिणाम मान रहे हैं। बदरीनाथ में काम रुका है, लेकिन केदारनाथ में 95% द्वितीय चरण का कार्य पूरा हो चुका है।

रुद्रप्रयाग: कड़ाके की ठंड के कारण जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बदरीनाथ महायोजना का काम रोक दिया गया है, वहीं केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण का काम जारी है। यहां श्रमिक काम में जुटे हैं।

ऐसा इसलिए, क्योंकि सात वर्ष बाद फिर यह स्थिति आई है कि जनवरी प्रथम सप्ताह में केदारघाटी में बर्फ जम नहीं पाई है। तापमान भले ही माइनस 10 डिग्री सेल्सियस हो लेकिन श्रमिकों के काम में गर्माहट है।

आमतौर पर जनवरी माह तक धाम में आठ से 10 फीट बर्फ जम जाती है, जिसके चलते पुनर्निर्माण कार्य पूरी तरह बंद हो जाते हैं। पिछले वर्ष इन दिनों साढ़े तीन से चार फीट तक बर्फ जम चुकी थी।

इस बार तीन बार हल्की बर्फबारी हो चुकी है, लेकिन बर्फ जम नहीं पाई है। विज्ञानी इसका कारण मौसम के पैटर्न का शिफ्ट होना और पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर होना मान रहे हैं।

आमतौर पर दिसंबर में केदारनाथ धाम में बर्फ जम जाती है, जिससे वहां पुनर्निर्माण कार्य जारी रखना संभव नहीं हो पाता और मजदूर लौट जाते हैं, लेकिन इस बार स्थितियां बदली हुई हैं। धाम में 50 से अधिक श्रमिक पुनर्निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।

हालांकि दोपहर में चार से पांच घटे ही कार्य हो पाता है। पुनर्निर्माण में वेल्डिंग और लकड़ी के कार्य ही हो रहे हैं। धाम में द्वितीय चरण के लगभग 95 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं। शेष बचे कार्य 2026 की केदारनाथ यात्रा से पहले पूर्ण कर लिए जाएंगे।

परियोजना के तृतीय चरण में 22 नए निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं, जिनके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जानी है। वर्ष 2019 में भी पुनर्निर्माण कार्य जनवरी प्रथम सप्ताह तक जारी रहे थे।

वर्ष 2019 में भी जनवरी शुरूआत तक बर्फबारी नहीं हुई थी, जिस कारण पुनर्निर्माण कार्य जनवरी माह के शुरूआत तक जारी रहा। आमतौर पर दिसंबर अंतिम सप्ताह तक सभी श्रमिक लौट जाते हैं। इस बार काम जारी है।

राघवेन्द्र सिंह, अधिशासी अभियंता, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केदारनाथ

तेजी से चल रहे काम

वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से केदारपुरी में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। केदारनाथ में लगातार तापमान नीचे लुढ़क रहा है। कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन श्रमिक काम में जुटे हैं।

वर्षा और बर्फबारी न होने का कारण जलवायु परिवर्तन है। मौसम का पैटर्न भी तेजी से शिफ्ट हो रहा है। यह ग्लोबल वार्मिंग का असर भी है। इससे अतिरेक परिस्थितियां पैदा होती हैं।

साथ ही पश्चिमी विक्षोप का कमजोर होना भी एक कारण है। पश्चिमी विक्षोप की दिशा भी बदल गई है। निर्माण गतिविधियों के बढ़ने से हिमालय के वायुमंडल की नमी कम हो जाती है। ब्लेक कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है।

डा. महावीर सिह नेगी, वरिष्ठ प्रोफेसर, गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर

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