
पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के कारण बढ़ी ठंड ने आसन रामसर साइट से प्रवासी पक्षियों की वापसी रोक दी है।
विकासनगर (देहरादून)। पहाड़ों में बर्फबारी व मैदानी क्षेत्रों में वर्षा के कारण बढ़ी ठंड ने प्रवासी परिंदों की वापसी रोक दी है। वर्तमान में चार प्रजातियों के करीब 1500 प्रवासी पक्षी आसन रामसर साइट में मौजूद हैं।
इनमें सबसे अधिक संख्या सुर्खाब की है। यह पक्षी सर्दी के मौसम की शुरुआत में शीतकालीन प्रवास पर यहां आए थे। यहां इस वर्ष करीब 126 प्रजातियों के 5806 परिंदे आए। मगर तापमान बढ़ने के बाद उनकी वापसी का सिलसिला शुरू हो गया था।
चकराता वन प्रभाग की आसन रेंज के वन दारोगा प्रदीप सक्सेना के अनुसार यहां मौजूद प्रवासी पक्षियों के लिए फिलहाल मौसम अनुकूल बना हुआ है।
वर्तमान में यहां रुडी शेलडक यानि सुर्खाब, कामन पोचार्ड, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड व कामन कूट प्रजातियों के परिंदों ने वापसी का क्रम टाल दिया है। यह पक्षी अब अपनी प्रवास अवधि पूरी करने के बाद ही अपने मूल स्थान को लौटेंगे।
देश का पहला कंजरवेशन रिजर्व व उत्तराखंड की पहली रामसर साइट आसन वेटलैंड शीतकाल में प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहता है।
यहां से अधिकांश प्रजातियों के परिंदें अपना प्रवास खत्म कर लौट चुके हैं। इस बार देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व आसन वेटलैंड में सुर्खाब सबसे ज्यादा संख्या में आए थे।
इसके अलावा गैडवाल, नार्दन शावलर, यूरोशियन विजन, इंडियन स्पाट बिल्ड डक, नार्दन पिनटेल्स, टफ्ड डक, कामन पोचार्ड, फेरिजिनस डक, यूरोशियन कूट, स्माल प्रेटिनकोल की संख्या भी काफी पाई गई।
पीजन टेल जकाना, इंडियन कारमोरेंट, बूटेड ईगल, कामन किंगफिशर, स्ट्राक बिल्ड किंगफिशर, लाइनटेड बारबेट आदि प्रजातियों के परिंदे भी प्रवास पर थे।









