
रुद्रप्रयाग में पोक्सो अदालत ने एक नाबालिग से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के मामले में सुमित सिंह को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
रुद्रप्रयाग। नाबालिग से दुष्कर्म और उसे गर्भवर्ती करने के मामले में पोक्सो की विशेष अदालत ने ऊखीमठ क्षेत्र के एक गांव निवासी सुमित सिंह को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पीड़िता ने गर्भवती होने के बाद मृत नवजात को जन्म दिया था। नवजात के डीएनए सैंपल दोषी से मिलना दोषी को सजा दिलाने में अहम सुबूत बना।
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार नौ मार्च 2025 को पीड़िता के पेट में तेज दर्द की शिकायत पर उसके पिता उसे जिला चिकित्सालय लाए।
चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान पीड़िता के गर्भवती होने की पुष्टि हुई। उसी दिन उसने एक मृत नवजात शिशु को जन्म दिया। चिकित्सकों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।
पीड़िता के पिता ने उसी दिन थाना ऊखीमठ में तहरीर दी। इसके आधार पर पोक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच अधिकारी ने पीड़िता के बयान के आधार पर 10 मार्च को सुमित सिंह को गिरफ्तार कर चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत न्यायालय में पेश किया।
जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार पुरसाड़ी भेज दिया गया। वहीं मृत नवजात शिशु का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया।
वहीं पीड़िता के न्यायालय में धारा 183 बीएनएसएस के तहत बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा न्यायालय की अनुमति से पीड़िता, दोषी और मृत नवजात शिशु के जैविक नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) देहरादून भेजे गए।
एफएसएल रिपोर्ट में मृत नवजात के जैविक माता-पिता के रूप में पीड़िता और दोषी सुमित सिंह की पुष्टि हुई। जांच के बाद पुलिस ने सुमित सिंह के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दायर किया।
राज्य की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक आशीष नेगी ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए गए।
दोनों पक्षों की अंतिम बहस सुनने के बाद विशेष जज (पोक्सो) सहदेव सिंह ने सुमित सिंह को धारा 65 (1) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 5 (जे) (2)/6 पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।








