Big Breaking:-गंगा तट पर फंसा हाथी चिंघाड़ता रहा… गुस्सा भी जताया, राजाजी टाइगर रिजर्व के वन कर्मी अपनी जिम्मेदारी से कतराते रहा

राजाजी टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों की संवेदनहीनता सामने आई है। गौहरीमाफी में गंगा तट पर एक घायल हाथी को वनकर्मी अपनी-अपनी रेंज में आने से रोकते रहे, जिससे उसे उपचार नहीं मिल पाया।

गौहरी और मोतीचूर रेंज के कर्मी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे। हाथी पूरे दिन तट पर ही खड़ा रहा, जिससे उसकी हालत बिगड़ती गई। पार्क निदेशक ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

रायवाला (देहरादून)। राजाजी टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों पर जिन वन्य जीवों की सुरक्षा का जिम्मा है, उन्हीं वन्य जीवों के प्रति वह कितने संवेदनहीन बने हुए है, इसका जीवंत उदाहरण सोमवार सुबह गंगा नदी तट पर नजर आया।

यहां गंभीर रूप से घायल एक हाथी सिर्फ जंगल में इसलिए नहीं जा पा रहा था कि वहां मौजूद वन कर्मी उसे अपनी-अपनी रेंज में आने ही नहीं दे रहे थे। पूरे दिन यही सिलसिला चलता रहा, जिसके चलते हाथी गंगा तट पर ही खड़ा रहा।

सोमवार तड़के ग्रामीणों ने गौहरीमाफी में बिरला मंदिर के समीप नदी तट पर एक हाथी को देखा। उसके एक पैर में चोट लगी हुई थी, जिसके चलते वह पैर को घिसटते हुए धीरे-धीरे चल पा रहा है। चलने के दौरान वह कई बार गिरने से भी बचा। खदरी व गौहरीमाफी के कई ग्रामीणों ने उसकी वीडियो भी बनाई।

दूसरी तरफ न सिर्फ चौंकाने वाला बल्कि, बेहद गैर जिम्मेदाराना दृश्य यह भी था की गौहरीरेंज के वन कर्मी गंगा के उस तरफ अपनी सीमा में और मोतीचूर रेंज के वन कर्मी गंगा के इस तरफ अपनी सीमा में खड़े होकर देख रहे थे।

फिर हाथी जैसे ही उनकी तरफ जाने लगता वह उसे खदेड़ देते। वह घायल हाथी को अपनी रेंज में नहीं आने दे रहे थे। जाहिर है कि वह हाथी की हालत को लेकर चिंतित नहीं थे, बल्कि अपनी जिम्मेदारी से बचने की जुगत में लगे रहे।

देर शाम तक दोनों तरफ के वनकर्मी अपनी-अपनी सीमा से हाथी पर नजर बनाए हुए थे, मगर किसी ने भी उसके उपचार के बारे में नहीं सोचा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह कि इतने बड़े संवेदशील मामले की जानकारी उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों तक को देने की जरूरत नहीं समझी।

वहीं हाथी कई बार चिंघाड़ते और गुस्सा जताते हुए देखा गया। इस बारे में पार्क निदेशक कोको रोसे बताया कि मामले की जानकारी ली जा रही है।

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