
उत्तराखंड ने सरकारी स्कूलों में छात्रों के लिए कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘कौशल बोध’ कार्यक्रम शुरू किया है।
देहरादून। राज्य में स्कूली शिक्षा को व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
उत्तराखंड स्टेट काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने 4000 से अधिक सरकारी विद्यालयों के 2.15 लाख छात्रों के लिए ‘कौशल बोध’ कार्यक्रम शुरू करने के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ अनुबंध किया है।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप कक्षा छह से आठ के छात्रों में कौशल और उद्यमिता की सोच विकसित करने पर केंद्रित है।
इस पहल के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सरकारी स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक के छात्रों को फ्यूचर-रेडी स्किल्स सिखाई जा रही हैं।
एससीईआरटी के प्रोग्राम समन्वयक सुनील भट्ट ने कहा कि मिडिल स्कूल स्तर पर ‘कौशल बोध’ के माध्यम से शुरुआत होती है, जो आगे ‘कौशलम’ कार्यक्रम के रूप में कक्षा नौ से 12 तक 2200 से अधिक स्कूलों में पहले से संचालित है।
इस कार्यक्रम में छात्र वास्तविक उद्यम बनाना, उन्हें संचालित करना और बाजार की चुनौतियों से निपटना सीखते हैं।
कौशल बोध कार्यक्रम यह नौ माड्यूल शामिल
कौशल बोध कार्यक्रम एनसीईआरटी की ओर से विकसित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांच- 2023 पर आधारित है, जिसमें लाइफ फार्म, मशीन एंड मैटेरियल्स एवं ह्यूमन सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में नौ माड्यूल शामिल हैं।
इसमें छात्र टीम के रूप में कार्य करते हुए अपने विचारों को उत्पाद और सेवाओं में बदलने का अभ्यास करते हैं। इससे उनमें निर्णय लेने, जिम्मेदारी निभाने और आत्मविश्वास विकसित करने की क्षमता बढ़ती है।
इस साझेदारी के तहत शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे कक्षा में प्रयोग आधारित सीखने का माहौल तैयार कर सकें।
कौशलम कार्यक्रम से नथुवावाला का छात्र ध्रुव हुए सफल
उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सीईओ मेकिन माहेश्वरी ने बताया कि नौ से 12वीं कक्षा तक के कौशलम कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
कक्षा 11 के छात्रों ने 1500 से अधिक बिजनेस आइडियाज पर काम किया, जिनमें से 350 से अधिक जिला स्तर पर प्रदर्शित हुए और 47 आइडियाज राज्य स्तर तक पहुंचे।
कुछ छात्रों ने अपने उद्यम शुरू कर दिए हैं। नथुवावाला के छात्र ध्रुव फैब इंडिया के साथ मिलकर परिधान सप्लाई कर रहे हैं, जबकि बाड़वाला, विकासनगर के समीर डेयरी उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं।
कक्षा छह से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में कौशल बोध किताब इस वर्ष से संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ शिक्षकों काे एससीईआरटी व उद्यम लर्निंग फाउंडेशन प्रारंभिक स्तर से प्रशिक्षण देगा। इससे नवाचारी और भविष्य के लिए शिक्षक तैयार होंगे और शिक्षा अधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक बन सकेगी।’
बंदना गर्ब्याल, निदेशक एससीईआरटी









