Big Breaking:-उत्तराखंड: हर तीसरा व्यक्ति शहरों की ओर, शहरी आबादी पहुंची 36.77 प्रतिशत

उत्तराखंड में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ अब हर तीसरा व्यक्ति शहरों में निवास कर रहा है। 2025-26 तक शहरी आबादी 36.77% तक पहुँच गई है, जो बेहतर सुविधाओं और अवसरों के कारण है।

देहरादून। उत्तराखंड में शहरीकरण विकास की नई धारा बन गया है। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती सुविधाओं, अवसरों और जीवनस्तर में सुधार के चलते राज्य का हर तीसरा व्यक्ति अब शहरों की ओर खिंचा चला आ रहा है।

वर्ष 2001-02 में जहां 21.72 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती थी, वर्ष 2011-12 में यह 26.55 प्रतिशत हो गई। अब 2025-26 में यह आंकड़ा 36.77 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

यह परिवर्तन राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का परिणाम है। बेहतर रोजगार के अवसर, उच्च शिक्षा संस्थान, उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक जीवनशैली की उपलब्धता ने लोगों को शहरों की ओर आकर्षित किया है।

पिछले एक दशक में करीब 17 लाख से अधिक लोगों का शहरों की ओर आना इसी सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

तेजी से बढ़ती शहरी आबादी ने जहां शहरों की रफ्तार बढ़ाई है, वहीं सरकार भी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

जल आपूर्ति, सीवरेज, यातायात और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जीवन अधिक सुगम हो गया है।

संतुलित विकास की ओर बढ़ता उत्तराखंड

राज्य में शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या वृद्धि दर 3.42 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 1.10 प्रतिशत है। पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

हर वर्ष करीब 3 करोड़ पर्यटकों का आगमन केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, वहीं शहरी क्षेत्रों में रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।

नए शहरों की दिशा में ठोस कदम

बढ़ती आबादी को संतुलित ढंग से बसाने के लिए सरकार ने सैटेलाइट टाउन और नए शहरी केंद्र विकसित करने की दिशा में योजनाएं शुरू की हैं। देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी के आसपास उप-शहरी क्षेत्रों का विस्तार किया जा रहा है।

डोईवाला, रायपुर और विकासनगर को विकसित कर राजधानी क्षेत्र का संतुलित विस्तार किया जा रहा है, वहीं ऋषिकेश-हरिद्वार कारिडोर को एक आधुनिक शहरी क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है। कुमाऊं में हल्द्वानी-काठगोदाम क्षेत्र को नए शहरी हब के रूप में विकसित करने की योजना भी आगे बढ़ रही है।

गांवों को आबाद करने के प्रयास

  • रिवर्स माइग्रेशन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आय के नए स्रोत विकसित
  • आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण
  • कृषि व संबद्ध क्षेत्रों को प्रोत्साहन
  • औद्योगिक व कौशल विकास पहल

‘शहरों में सड़क, बिजली, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही शहरों से जुड़े कस्बों में भी शहरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि बड़े शहरों पर दबाव कम हो और विकास का लाभ व्यापक क्षेत्र तक पहुंचे।’


राम सिंह कैड़ा, शहरी विकास मंत्री

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