
उत्तराखंड सूचना आयोग ने अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित द्वितीय अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया है।
मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने आदेश दिया कि अपीलार्थी संजीव चतुर्वेदी को शिकायतों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने कहा कि गोपनीयता का हवाला देकर सूचना रोकना उचित नहीं, क्योंकि यह सार्वजनिक हित का मामला है।
नैनीताल। उत्तराखंड सूचना आयोग ने अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों और पर दर्ज शिकायतों से संबंधित द्वितीय अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया है।
आयोग ने कहा है कि अपीलार्थी को अधीनस्थ न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों और न्यायाधीशों के खिलाफ दर्ज शिकायतों से संबंधित जानकारी अपीलकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने पहली जनवरी को मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान हल्द्वानी आइएफएस संजीव चतुर्वेदी की अपील पर यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
अपील में संजीव ने उन्होंने पहली जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच अधीनस्थ न्यायपालिका पर लागू नियम, शिकायतों की संख्या, उन पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
हाई कोर्ट के लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इन्कार करते हुए तर्क देते हुए कि शिकायतें संवेदनशील और गोपनीय हैं। यह भी कहा कि अपीलार्थी की ओर से मांगी गई सूचनाएं गोपनीय व तीसरे पक्ष से संबंधित होने के कारण उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है।
यदि किसी विशिष्ट शिकायत के संबंध में सूचना प्राप्ति का अनुरोध पत्र सूचना का अधिकार अधिनियम, उत्तराखंड उच्च न्यायालय सतर्कता नियम-2019 के अंतर्गत प्रस्तुत करते हैं तो शिकायत के संबंध में सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है। गोपनीय प्रकृति की सूचना उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायाधीश से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।
जिसके बाद संजीव ने सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। इस मामले में आयोग ने कहा कि वांछित सूचना अपेक्षित है। आयोग ने सूचना आयोग ने कहा कि केवल यह कहना कि सूचना गोपनीय है, यह न देने का आधार नहीं हो सकता।
स्पष्ट किया कि शिकायतों की संख्या और निस्तारण प्रक्रिया सार्वजनिक हित में आती है, लेकिन किसी अधिकारी या न्यायाधीश की व्यक्तिगत पहचान नहीं बताई जाएगी।
आयोग ने निर्देश दिए कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेने के बाद एक माह के भीतर जानकारी अपीलकर्ता को उपलब्ध कराई जाए। मुख्य सूचना आयुक्त ने द्वितीय अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निस्तारित भी कर दिया है।
यह मांगी थी सूचनाएं
उत्तराखंड की अधीनस्थ न्यायपालिका के कामकाज को नियंत्रित करने वाले सभी संबंधित सेवा नियमों और उत्तराखंड राज्य की अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारी-न्यायाधीशों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया से संबंधित सभी प्रासंगिक सेवा नियमों की प्रमाणित प्रतियां।
सभी प्रक्रियाओं, नियमों और सक्षम प्राधिकारी का विवरण प्रदान करें, जिनके समक्ष उत्तराखंड राज्य में अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारी-न्यायाधीशों के विरुद्ध भ्रष्टाचार और अन्य प्रकार के दुराचार की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं, साथ ही ऐसे किसी भी प्रोफार्मा की प्रतियां, और ऐसी शिकायत दर्ज करने के लिए अन्य प्रासंगिक दस्तावेज-जानकारी भी प्रदान करें।
पहली जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 तक उत्तराखंड राज्य में अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारी-न्यायाधीशों पर दर्ज की गई शिकायतों की कुल संख्या, ऐसे मामलों की संख्या से संबंधित सभी जानकारी की प्रमाणित प्रतियां प्रदान करें, जिनमें अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई या की गई।









