
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड को अगले पांच वर्षों में आपदा प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार से 5504 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर यह राशि केंद्रीय बजट में प्रावधानित की गई है।
राज्य में हर साल अतिवृष्टि, भूस्खलन और भूकंप जैसी आपदाओं से भारी नुकसान होता है। इस धनराशि से पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों में मदद मिलेगी, जिससे आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।
देहरादून। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड को पांच वर्ष की अवधि में आपदा प्रबंधन के लिए 5504 करोड़ रुपये की धनराशि अनुदान के रूप में केंद्र सरकार से मिलेगी।
16वें वित्त आयोग ने राज्य के लिए यह अनुदान संस्तुत किया है, जिसकी संस्तुतियों को केंद्र ने स्वीकार करते हुए केंद्रीय बजट में इसका प्रविधान भी किया है। प्रतिवर्ष इसमें से निश्चित राशि राज्य को उपलब्ध होगी।
आपदा और उत्तराखंड का मानो चोली-दामन का साथ है। हर साल ही वर्षाकाल में अतिवृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ जैसी आपदाओं से राज्य जूझता है।
गत वर्ष भी धराली, थराली समेत अन्य स्थानों पर आई आपदा में बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हुई। तब आपदा से 15 हजार करोड़ से अधिक की क्षति आंकलित की गई।
इसके अलावा भूकंप की दृष्टि से भी उत्तराखंड बेहद संवेदनशील है। यही नहीं, जंगलों में लगने वाली आग और मानव-वन्यजीव संघर्ष रूपी आपदा भी कम नहीं है।
साफ है कि इन परिस्थितियों में आपदा से उबरने के लिए बड़ी राशि चाहिए। यद्यपि, केंद्र सरकार इसमें निरंतर सहयोग करती आ रही है।
इसके साथ ही 16वें वित्त आयोग ने भी राज्य की इस परिस्थिति को समझा है और उसे आपदा प्रबंधन के लिए पांच वर्ष की अवधि के भीतर 5504 करोड़ रुपये की राशि अनुदान के रूप में दिए जाने की संस्तुति की।
केंद्र ने भी इसे स्वीकारा है और अब यह धनराशि मिलने पर पुनर्निर्माण कार्यों और पुनर्वास के लिए बजट की कमी नहीं रहेगी।









