
रुद्रपुर के सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र के पहले दिन बच्चों को मिड-डे मील का सामान और किताबों के बंडल ढोते देखा गया। शिक्षक आराम कर रहे थे, जबकि छोटे बच्चे गर्मी में बोझ उठा रहे थे।
रुद्रपुर । शिक्षा के मंदिर में पहले ही दिन जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को आईना दिखा दिया।
जहां बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और उत्साह होना चाहिए था, वहां वे जिम्मेदारियों का बोझ ढोते नजर आए। “मुस्कराइएं ! आप सरकारी स्कूल में हैं” यह जुमला खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित प्राथमिक विद्यालय में मजाक साबित हो रहा है।
खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित प्राथमिक विद्यालय में जागरण की टीम नए शिक्षा सत्र में बच्चों की स्थिति जानने पहुंची। लेकिन यहां छोटे-छोटे किताबों की जगह मिड डे मील का सामान ढोते दिखे। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला था, बल्कि व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
गर्मी के बीच इस स्कूल के शिक्षक एक कमरे मे पंखे की हवा ले रहे थे और बोझ ढोने का काम बच्चों को सौंप रखा था। संजयनगर खेड़ा में प्राथमिक विद्यालय में टीम ने देखा कि बच्चे किताबों के बंडल ढो रहे थे। फोटो क्लिक किया कि उससे पहले ही एक शिक्षक ने तत्काल बच्चों को किताबें रखवाकर कक्षों में भगा दिया।
शिक्षा अधिकारी को स्कूल से नहीं मिला नोटिस का जवाब
आपको बताते चलें कि पिछले दिनों राजकीय प्राथमिक विद्यालय रम्पुरा में परीक्षा देने आए कक्षा पांच के एक छात्र को सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसी भेज दिया। भोजनमाता के साथ स्कूली ड्रेस पहने लाइन में लगे इस बालक को देखकर सभी की नजरें टिक गईं।
पूछने पर पता चला कि शिक्षकों ने उसे सिलेंडर लेने भेजा है। खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने संबंधित स्कूल को नोटिस देकर जवाब मांगने और कार्रवाई करने की बात कही थी। लेकिन इस मामले में बुधवार तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं आ सकी है।
बच्चों से तो काम कराना ही मना है, अगर ऐसा है तो संबंधित प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों से इस संबंध में लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। – हरेंद्र मिश्रा, प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी ऊधम सिंह नगर








