
श्यामपुर में एक पत्नी ने पति की हत्या कर दी, बिना किसी पछतावे के। पूजा ने बबलू को तकिए से गला घोंटकर मार डाला, फिर सुबह होने का इंतजार किया।
श्यामपुर। बेरहम पत्नी को अपने सुहाग को जहर देने के बाद भी कोई मलाल नहीं हुआ। इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद वह सुबह होने का इंतजार करती रही और सुबह हो जाने पर पहले चूल्हे पर चाय बनाकर बच्चों सहित खुद पीने के बाद थाने पहुंची। पुलिस के सामने घड़ियाली आंसू बहाकर पति का जहर खाकर मरने की कहानी गढ़ने लगी।
दो दिन पूर्व लाहड़पुर गांव में बबलू का जिस अवस्था में मृत होना पाया गया, वह पुलिस ही नहीं, किसी ग्रामीण के भी गले नहीं उतर रहा था। पत्नी के अनुसार उसके पति बबलू ने जहर खाकर अपनी जान दी थी, मगर जिस चारपाई पर उसकी लाश पड़ी थी, वह बिस्तर पूरी तरह व्यवस्थित था।
जहर खाकर मरने वाला आदमी तड़पता है तो उसके बगल वाले कमरे में सोयी उसकी पत्नी और उसके बच्चों को इसका अहसास कैसे नहीं हुआ। वहीं, पुलिस ने जब उन सब से पूछताछ की तो उनकी बेटी और उसकी पत्नी के बयानों में कुछ विरोधाभास नजर आया। इसके बाद पुलिस को मामला संगीन प्रतीत होने लगा।
तमाम साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपित महिला और उसकी बेटी ने अपना जुर्म कबूला। बेरहम, निर्दयी पत्नी का दिल अपने पति का तकिये से गला घोट कर उसकी जान लेने के बाद भी नहीं पसीजा।
पति को मौत के घाट उतारने के बाद उसकी पत्नी और बेटी ने लाश को एक कमरे से दूसरे कमरे में शिफ्ट किया और पूरी रात वह सुबह होने का इंतजार करने लगे।
किसी को इस बात की भनक न लगे, इसके लिए आरोपित महिला रोजाना की तरह पड़ोस से दूध लेने गई और घर जाकर चूल्हे में आग जलाकर चाय पीने के बाद थाने पहुंची। गांव के लोग इस घटना से काफी सन्न हैं। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली इस घटना के बाद गांव में एक अलग ही माहौल हो गया है।
पत्नी को वापस लाने के लिए जमीन भी बेची
ग्रामीणों की मानें तो बबलू पूजा से बेहद प्यार करता था। एक बार पूर्व में जब पूजा घर से भागकर अपने प्रेमी के साथ गई थी, तब बबलू ने अपनी जमीन बेचकर उसे वापस बुलाया था।
बताया जा रहा है कि बबलू ने अपनी बेटी की शादी के लिए कर्ज लिया था, नहीं चुकाने पर पूजा अपने प्रेमी के पास पहुंच गई थी। इसके बाद मजबूरन बबलू को जमीन का टुकड़ा बेचना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि बबलू में अपने जमीन नहीं बेची, बल्कि अपनी मौत को दावत दी थी। उसी पूजा को वही छोड़ देना चाहिए था, आज ऐसे हालात नहीं होते।








