
Angel Chakma Case देहरादून पुलिस ने एंजेल चकमा हत्याकांड के मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी को नेपाल से भारत लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भारत न्याय संहिता की धारा-110 के तहत जिला जज से स्थायी वारंट जारी कराकर नेपाल दूतावास भेजा गया है।
एसटीएफ और एसओजी टीमें सक्रिय हैं। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया समय लेगी, लेकिन आरोपी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
देहरादून। Angel Chakma Case त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा हत्याकांड में फरार मुख्य आरोपित नेपाल निवासी यज्ञराज अवस्थी को भारत लाने के लिए दून पुलिस ने अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले लिया है।
आरोपित की तलाश में एसटीएफ उत्तराखंड को सक्रिय कर दिया गया है, जबकि एसओजी की टीमें नेपाल में समन्वय स्थापित कर रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपित की लोकेशन ट्रेस हो चुकी है, लेकिन सीमा पार होने के कारण सीधी गिरफ्तारी में कानूनी अड़चन आ रही है।
इसी के चलते पुलिस ने भारत न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा-110 के तहत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इसके अंतर्गत जिला जज से स्थायी वारंट जारी कराकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल भेजा गया था। उच्च न्यायालय की ओर से प्रक्रिया पूरी कर उसे नेपाल दूतावास भेज दिया गया है।
अब नेपाल दूतावास आरोपित को पकड़कर दून पुलिस के सिपुर्द करेगा। नौ दिसंबर को देहरादून में हुए विवाद के दौरान एंजेल चकमा पर चाकू और कड़े से जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें उसकी मौत हो गई।
इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर दो नाबालिगों सहित पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि नेपाल निवासी यज्ञराज अवस्थी वारदात के बाद सीमा पार फरार हो गया था।
उसकी तलाश में इंटेलिजेंस को सक्रिय किया गया और दून पुलिस की दो टीमें नेपाल भेजी गईं, जहां उसकी मौजूदगी की पुष्टि भी हुई, लेकिन संधि और अधिकार क्षेत्र के कारण गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी।
क्या है बीएनएसएस की धारा-110
एसएसपी अजय सिंह के मुताबिक, बीएनएसएस की धारा-110 मित्र देशों के साथ प्रत्यर्पण से जुड़ा विशेष प्रविधान है।
इसके तहत यदि कोई आरोपित गंभीर अपराध कर भारत से बाहर फरार हो जाता है और उस देश के साथ भारत की संधि या फिर पारस्परिक कानूनी सहयोग व्यवस्था मौजूद है, तो भारत सरकार उस देश से औपचारिक अनुरोध कर सकती है।
प्रक्रिया में आरोपित के खिलाफ साक्ष्य, चार्जशीट और अदालत की अनुमति के साथ विदेश मंत्रालय के माध्यम से प्रत्यर्पण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है। देहरादून पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी दस्तावेज तैयार कर उच्च स्तर पर भेज दिए हैं।
नेपाल सरकार से भी औपचारिक संपर्क साधा गया है, ताकि आरोपित को कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया समय लेने वाली जरूर है, लेकिन आरोपित को कानून के शिकंजे में लाने का सबसे प्रभावी और वैधानिक रास्ता यही है।
एसटीएफ और एसओजी का संयुक्त आपरेशन
आरोपित की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एसटीएफ उत्तराखंड को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसओजी की टीमें नेपाल में स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।
पुलिस का दावा है कि आरोपित की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि प्रत्यर्पण की अनुमति मिलते ही उसे तुरंत हिरासत में लिया जा सके।
एंजेल चकमा हत्याकांड में मुख्य आरोपित को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बीएनएसएस की धारा-110 के तहत की जा रही यह कार्रवाई न केवल इस मामले में अहम है, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार अपराधियों के विरुद्ध उत्तराखंड पुलिस की बड़ी मिसाल भी बनेगी।
-अजय सिंह, एसएसपी देहरादून









