उत्तराखण्ड

Big Breaking:-अडानी के लिए बदले 86 में से 84 नियम; उत्तराखंड पावर प्लांट पर कांग्रेस के आरोप

अडानी के लिए बदले 86 में से 84 नियम; उत्तराखंड पावर प्लांट पर कांग्रेस के आरोप

पावर प्लांट पर दिल्ली से दौड़े करंट से देहरादून में कलह मच गया है। कांग्रेस का आरोप है कि उत्तराखंड की सरकार ने अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया के मानक बदल दिए।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट की प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि पसंदीदा उद्योगपति गौतम अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने निविदा प्रक्रिया को बदल दिया।

राज्यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों (पीएसयू) की संयुक्त कंपनी से परियोजना छीनकर अडानी समूह को दिए जाने के कारण राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर 25 साल में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। खेड़ा ने पीएसयू को पुष्कर सेलिंग उत्तराखंड करार देते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया है।

धामी सरकार ने अडानी ग्रुप को फायदा पहुंचाया

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2024 में केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। इसमें कहा गया था कि 1320 मेगावॉट का पावर प्लांट लगाया जाएगा। यह प्लांट यूजेवीएन और टीएचडीसी का संयुक्त उपक्रम होगा। बाद में केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उन्होंने दावा किया कि 16 जनवरी, 2025 को समयसीमा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इस सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को छोड़ दिया गया तथा इसके बाद उत्तराखंड विद्युत निगम लिमिटेड ने तीन फरवरी 2025 को 1,320 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए नए सिरे से निविदा जारी की।

पवन खेड़ा ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रस्तावित परियोजना क्यों खत्म किया। निविदा की इतनी अधिक शर्तों में बदलाव क्यों किए गए।

86 मानकों में से 84 बदले गए: खेड़ा
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बिजली मंत्रालय के मानक निविदा दस्तावेज में 86 में से 84 बदलाव किए गए। इनमें परियोजना को उत्तराखंड के बजाए देश में कहीं भी स्थापित करने और बिजली को एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक पहुंचाने की लागत को बोलीदाता के बजाए सरकारी खजाने पर डालना शामिल है। उन्होंने कहा कि नई निविदा में फिक्स चार्ज को भी 70 फीसदी से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया। इसके साथ यह गारंटी भी दी कि अदाणी पावर से उत्तराखंड बिजली खरीदे या नहीं, 25 वर्षों तक कंपनी को पैसा मिलता रहेगा। पवन खेड़ा ने इसके साथ निविदा में कई दूसरे बदलावों को लेकर भी मुख्यमंत्री पर घेरा।

कांग्रेस ने सरकार से पूछे आठ सवाल
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मामले में सरकार से आठ सवाल पूछे हैं। मीडिया को जारी बयान में उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की पूरी निविदा प्रक्रिया को सार्वजनिक करते हुए स्वतंत्र एजेसी से इसकी जांच कराई जाए।

  1. टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
  2. इन बदलावों का प्रस्ताव किस अधिकारी संस्था ने दिया?
  3. क्या बदलाव किसी संभावित बिडर की पात्रता अथवा सुविधा को प्रभावित करते थे?
  4. उत्तराखंड की बिजली आवश्यकता के लिए परियोजना छत्तीसगढ़ में लगाने का निर्णय क्यों?
  5. बिजली की अंतिम लागत में कोयला, परिवहन, ट्रांसमिशन, व अन्य चार्ज कितने होंगे?
  6. ₹5.746 प्रति यूनिट की दर का कंपटेटिव बिडिंग डेटा सरकार कब सार्वजनिक करेगी?
  7. 25 वर्ष के पीपीए की प्रत्येक प्रमुख शर्त जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही?
  8. उत्तराखंड के उपभोक्ताओं को इस समझौते से वास्तविक आर्थिक लाभ क्या मिलेगा?
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