निर्वाचन आयोग ने किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना स्थगित कर दी है। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया, अब पांच अक्टूबर से नियमित सुनवाई होगी।
नैनीताल। हाई कोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले में नगर पालिका किच्छा और नगरपालिका सिरौली कलां के चुनाव से संबंधित मामले में सुनवाई की। न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से बताया गया कि दोनों नगर पालिकाओं में मतदान 22 सितंबर को होना है जबकि मतदान के बाद मतगणना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया।
आयोग की ओर से संशोधित अधिसूचना के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई को पांच अक्टूबर की तिथि नियत की है। पांच अक्टूबर से कोर्ट मामले में नियमित सुनवाई करेगी।
किच्छा निवासी नईम उल शान व मोहम्मद रफीक ने किच्छा नगरपालिका से संबंधित 24 अप्रैल 2025 की अस्थायी अधिसूचना को याचिका दायर कर चुनौती दी थी।
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से मई 2025 को सिरौलीकलां क्षेत्र को अलग नगर पालिका के रूप में अधिसूचित कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने इस आधार पर चुनौती दी कि जब यह पूर्व से ही नगर पालिका किच्छा का भाग है, तो इसको संविधान के अनुच्छेद 243 के प्रविधान के विपरीत पृथक कैसे किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सिरौलीकलां को अलग नगर पालिका बनाना हाई कोर्ट के पिछले आदेशों और 2024 में दिए गए अंतरिम स्थगनादेश का उल्लंघन है। इसके अनुसार सिरौलीकलां का दर्जा अभी भी किच्छा नगर पालिका के हिस्से के रूप में है।
इधर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सात सितंबर 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना को याचिका दायर कर चुनौती दी गई। इस अधिसूचना में नगरपालिका किच्छा और सिरौलीकलां में अलग-अलग चुनाव कराने का कार्यक्रम जारी किया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि सिरौलीकलां को एक अलग नगर पालिका मानकर चुनाव कराना उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश) नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 3(1)(2) और धारा 9 ए (चक्रीय आरक्षण नियम) का उल्लंघन है।
यह कदम जनगणना नियम 1990 के नियम 8(1)(iv) और भारत सरकार की 16 जून 2025 की अधिसूचना के विपरीत है क्योंकि एक बार जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद कोई भी नई प्रशासनिक इकाई जैसे कि पृथक सिरौली कला नगर पालिका अस्तित्व में नहीं आ सकती।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि देर से हो रहे नगर पालिका चुनावों को उस तिथि के उपलब्ध आंकड़ों (दिसंबर 2023) के आधार पर कराया जाना चाहिए था, जब उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था, ना कि नए परिसीमन के आधार पर।
इस मामले में सरकार व निर्वाचन आयोग से मामला विचाराधीन होने के बीच चुनाव अधिसूचना जारी करने से संबंधित जवाब मांगा था। कोर्ट की सख्ती के बाद अब निर्वाचन आयोग ने मतगणना स्थगित कर दी है।