Big Breaking:-देहरादून से 18 करोड़ मिलने पर ही सुधरेगी हल्द्वानी की 47 बदहाल सड़कें, बदहाली से लोग परेशान

हल्द्वानी नगर निगम ने 47 खराब सड़कों की मरम्मत के लिए शहरी विकास निदेशालय से 18 करोड़ रुपये की मांग की है। तकनीकी समिति से प्रस्ताव पास होने के बाद इसे शासन को भेजा गया है।

शहर की आंतरिक सड़कों की बदहाली से लोग परेशान हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बजट मिलने के बाद ही इन सड़कों का सुधार संभव हो पाएगा, जिससे निवासियों को राहत मिलेगी।

हल्द्वानी। सड़क की खराबी की वजह से हादसे में किसी के जान गंवाने के बाद अक्सर बड़े अधिकारी निरीक्षण और बैठक में यह निर्देश देते हुए दिखते हैं कि जल्द से जल्द सड़कों का हाल ठीक होना चाहिए।

लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी की जाएगी। लेकिन एक हकीकत यह है कि गड्ढे भरान हो या सड़कों का नए सिरे से निर्माण। इसके लिए चाहिए पैसे।

बजट न होने पर दिखावे के लिए दो-चार उखड़ी सड़कों पर डामर या कुछ गड्ढों पर बजरी-मिट्टी भरान से ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। दूसरी तरफ साठ वार्डों वाले नगर निगम के हाल पर नजर डाले तो उसकी 47 सड़कें बदहाल पड़ी है।

जिनकी मरम्मत के लिए शहरी विकास निदेशालय से 18 करोड़ की मांग की गई है। अब देखना यह है कि बजट कब तक मिलता है?

साठ वार्डों वाले नगर निगम की आबादी करीब साढ़े चार लाख है। वार्डों से जुड़ी आंतरिक सड़कों की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। लेकिन अक्सर आबादी क्षेत्रों में सड़कों का हाल ठीक नहीं मिलता। जिसके बाद नगर निगम ने 47 सड़कों के सुधारीकरण को लेकर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है।

निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये की डिमांड की गई है। निर्माण विंग के अनुसार प्रस्ताव में वार्ड 45 में सरस्वती विहार, वार्ड 53 में कांता बैंक्वेट हाल, वार्ड 43 में शिवा इंक्लेव, वार्ड 47 में कृष्णा विहार,

वार्ड 40 में हिम्मतपुर मल्ला के पास की सड़क, वार्ड 40 में कृष्ण इंक्लेव समेत अन्य मार्गों को शामिल किया गया है। जिला स्तर पर तकनीकी समिति से भी प्रस्ताव पास कराए गए हैं।

सात हजार सड़कों की लंबाई 928 किमी, लोग तीन


गली-मोहल्ले के अलावा अन्य छोटे-छोटे मार्ग मिलाकर निगम की सड़कों की संख्या करीब सात हजार बैठती है। जिनकी कुल लंबाई 928 किमी है। लेकिन निगरानी सिस्टम मजबूत नहीं है।

नियमित इंजीनियरों के तौर पर एक एई और एक जेई ही है। जबकि तीसरा इंजीनियर सप्ताह में तीन दिन ही आता है। इनकी नियमित नियुक्ति दूसरे विभाग में है।

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