Big Breaking:-उत्तराखंड के एक स्कूल में छात्रा की पानी की बोतल में शराब मिली, बाथरूम में सिगरेट पीते मिला

हल्द्वानी के एक प्राइवेट स्कूल में छात्रा की पानी की बोतल से शराब मिली तो दूसरे स्कूल में नाबालिग छात्र सिगरेट पीते मिला। मामलों की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की काउंसलिंग शुरू करा दी है।

यह कोई सामान्य खबर नहीं, बल्कि समाज और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। नशे की लत अब गली-मोहल्लों से निकलकर स्कूलों की चारदीवारी के भीतर पहुंचती दिख रही है।

हल्द्वानी के निजी स्कूलों में सामने आए हालिया मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों दोनों को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी स्कूल में छात्रा की पानी की बोतल से शराब मिलने का मामला सामने आया, जबकि दूसरे स्कूल में एक छात्र बाथरूम में सिगरेट पीते हुए पकड़ा गया।

मामलों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्कूल प्रबंधन ने तत्काल अभिभावकों को बुलाया और बच्चों की काउंसलिंग शुरू कराई। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में इन छात्रों की विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बढ़ता मानसिक दबाव, दोस्तों का गलत प्रभाव, मोबाइल-सोशल मीडिया और फिल्मों से मिलने वाली नकारात्मक प्रेरणा, साथ ही अभिभावकों की व्यस्त दिनचर्या इस समस्या को और गहरा रही है। पारिवारिक तनाव, अकेलापन और पढ़ाई को लेकर अत्यधिक अपेक्षाएं भी बच्चों को इस राह पर धकेल रही हैं।

दो महीनों में स्कूलों में नशे की लत से जुड़े कई मामले

मनोचिकित्सा विभाग, एसटीएच के मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत के अनुसार, “बीते दो महीनों में हमारे पास छात्र-छात्राओं से जुड़े कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें बच्चे स्कूल में शराब या सिगरेट का सेवन करते या अपने पास रखते पाए गए। स्कूल प्रबंधन के माध्यम से अभिभावकों को बुलाकर इन बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।”

विशेषज्ञों की अभिभावकों को सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से निपटने के लिए अभिभावकों को बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाना होगा। उनसे खुलकर बातचीत करें, रोजाना समय बिताएं, उनकी संगत और गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य व्यवहार को हल्के में न लें। जरूरत पड़ने पर समय रहते काउंसलिंग कराना बेहद जरूरी है।

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