
लूट की घटना को अंजाम देने के लिए घर में घुसे बदमाशों ने अंकित थपलियाल की हत्या कर दी थी। अंकित की हत्या के बाद माता-पिता डर कर अपनी बेटियों के पास बंगलूरू, मुंबई और न्यूजीलैंड चले गए। जब भी उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आता है नींद उड़ जाती है। अब 12 साल बाद बेटे को इंसाफ मिला है।
12 वर्ष पहले अंकित थपलियाल की हत्या करने वाला मुख्य आरोपी अकरम बुधवार रात पुलिस की गोली से ढेर हो गया। अंकित के बुजुर्ग माता-पिता को बृहस्पतिवार सुबह इसकी सूचना मिली तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक गए।सितंबर 2014 में नकरौंदा के बालावाला में अकरम निवासी शामली ने अपने पांच साथियों के साथ मिलकर अंकित थपलियाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आरोपी अंकित के घर में लूट की घटना को अंजाम देने के लिए घुसे थे। सहायक कृषि अधिकारी के पद से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुए अंकित के पिता सुरेंद्र थपलियाल ने बताया कि बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने सितंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की लेकिन वहां से नैनीताल हाईकोर्ट जाने के लिए कहा गया तो उम्मीद टूट गई। मायूस होकर उन्होंने दस्तावेज भी फाड़ दिए थे लेकिन अब बेटे के हत्यारे के एनकाउंटर में ढेर होने से मन को शांति मिली है।
बेरहमी से इकलौते बेटे की हत्या
अंकित की मां अंजनी बेटे की तस्वीर हाथ में लेकर बोलीं कि अभी पांच हत्यारों को और मारा जाना बाकी है। इसके बाद ही कलेजे को ठंडक मिलेगी। जिस बेरहमी से उनके इकलौते बेटे की हत्या की थी उसी तरह सभी को मारना चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद डर कर वे अपनी बेटियों के पास बंगलूरू, मुंबई और न्यूजीलैंड में रहीं। जब भी उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आता है नींद उड़ जाती है। मकान के नीचे के तल पर हुई घटना को भूलने के लिए उन्होंने ऊपर कमरे बनवाए। अब वे वहीं रह रही हैं।
अंकित थपलियाल के माता-पिता ने कहा कि आज अकरम के मारे जाने के बाद उनके दिल को ठंडक मिली है। अकरम को उसके कर्मों की सजा मिली है। इसके लिए वे देहरादून पुलिस का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि बाकी पांचों बदमाशों को भी सजा मिलनी चाहिए। न्यायालय से अपील करते हैं कि पांचों को फांसी दी जाए।
अंकित के नाम का गेट लगाने की मांग
नकरौंदा क्षेत्र के विवेक विहार में रह रहे अंकित के परिवार और क्षेत्रवासी भारती बिष्ट, सिद्धी कोठारी, हेमलता मिश्रा और सीपी कोठारी की सिर्फ एक ही मांग है कि सोसायटी में अंकित के नाम का गेट लगना चाहिए। अंकित ने अपने पिता, मां और नानी की रक्षा के लिए खुद की जान दांव पर लगा दी थी।









