Big Breaking:-कांग्रेस ने की उत्तराखंड बजट सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग, सीएम धामी को लिखा लेटर

वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर आगामी विधानसभा बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिन और तीन सोमवारों सहित आयोजित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सर्वोच्च मंच है,

इसलिए सत्र की अवधि पर्याप्त होनी चाहिए। आर्य ने पिछली सत्रों की कम अवधि और प्रश्नकाल वाले सोमवारों की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की, जिससे जनहित के मुद्दे प्रभावी ढंग से नहीं उठ पाते।

देहरादून। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व विधायक यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर आगामी विधानसभा बजट सत्र को न्यूनतम 21 दिन तथा कम से कम तीन सोमवारों सहित आयाेजित करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सर्वोच्च मंच है, इसलिए सत्र की अवधि पर्याप्त होना अत्यंत आवश्यक है।

आर्य ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि विधानसभा में प्रश्नकाल एवं अन्य संसदीय नियमों के माध्यम से पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी-अपनी विधानसभाओं तथा राज्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं। कार्यसंचालन नियमावली में सदस्यों के विशेषाधिकार सुनिश्चित हैं और संबंधित विभागों की ओर से तथ्यपूर्ण व संतोषजनक उत्तर देना मंत्रियों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार सोमवार का दिन मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों के प्रश्नों के लिए निर्धारित रहता है। किंतु वर्तमान पंचम विधानसभा (29 मार्च 2022 से प्रारंभ) में अब तक नौ सत्र आयोजित हुए हैं और कुल 32 कार्य दिवस ही हुए हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। इन 32 उपवेशनों में एक भी अवसर ऐसा नहीं आया जब प्रश्नकाल सहित सोमवार को सदन संचालित हुआ हो।

आर्य ने ध्यान दिलाया कि मुख्यमंत्री के अधीन लगभग 75 में से करीब 40 विभाग आते हैं, जिनमें गृह, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा, आपदा प्रबंधन, पेयजल, ऊर्जा, औद्योगिक विकास, शहरी विकास एवं संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अवधि को पर्याप्त करने से विभागों से संबंधित प्रश्नों पर भी विस्तृत चर्चा हो सकेगी।

आगामी बजट सत्र का उल्लेख करते हुए आर्य ने कहा कि इस दौरान मुख्यमंत्री वित्त मंत्री के रूप में बजट भाषण प्रस्तुत करेंगे, सामान्य बजट पर चर्चा होगी, विभागवार अनुदान मांगों पर विचार और वित्त विधेयक से संबंधित महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपन्न होंगे। ऐसे में सत्र की अवधि पर्याप्त न होने से जनप्रतिनिधियों को जनहित के मुद्दे प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

उन्होंने आग्रह किया कि लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त बनाने तथा जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बजट सत्र को कम से कम 21 दिन तथा तीन सोमवारों सहित आयोजित किया जाए।

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