
टिहरी झील में फ्लोटिंग हट्स का संचालन ली राय कंपनी को विवादित तरीके से सौंपा गया है, जिसमें कम टेंडर राशि और लंबी लीज अवधि शामिल है।
नई टिहरी। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से वर्ष 2018 में टिहरी झील में डोबरा-चांठी के पास फ्लोटिंग हट्स का निर्माण कराया था।
शुरू में तीन वर्ष तक इसका संचालन जीएमवीएन की ओर से किया, लेकिन वर्ष 2022 में सरकार की ओर से इस फ्लोटिंग हट्स का संचालन ली राय कंपनी को पीपीपी मोड सौंप दिया गया।
पहले और दूसरे टेंडर में सरकार की ओर से प्रति वर्ष साढ़े सात करोड़ की डिमांड रखी गई थी। हालांकि, बाद में इसे आनन-फानन में मात्र डेढ़ करोड़ रुपये के सालाना टेंडर पर दे दिया। इसमें टेंडर अवधि को लेकर भी कंपनी पर खासी महरबानी की गई है।
अमूमन सरकार की ओर से 15 से 20 वर्ष के लिए ही अपनी सम्पत्ति लीज पर दी जाती है। लेकिन सरकार ने ली राय कंपनी को इन हट्स को 30 वर्षों के लिए लीज पर सौंप दिया।
इसमें 12 वर्ष की अनकंडिशनल बढ़ोतरी भी की जा सकती है। तब अब तक कई बार विवादों में रहने और स्थानीय नागरिकों के विरोध के बावजूद यह फ्लोटिंग हट्स बेधड़क संचालित हो रहा है।
उत्तरायणी समिति ने सीवर की गंदगी के विरोध में किया था आंदोलन
फ्लोटिंग हट्स को बंद करने की मांग को लेकर वर्ष नवंबर 2022 में नई टिहरी के स्थानीय निवासियों ने आंदोलन भी किया था।
तब उत्तरायणी समिति की ओर से टिहरी झील में सीवर की गंदगी डालने वाले फ्लोटिंग हट्स के खिलाफ डीएम को ज्ञापन भी दिया गया था और 11 नवंबर को स्थानीय लोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में मिलने गए थे।
उत्तरायणी समिति की ओर से ली राय कंपनी के पीपीपी मोड में संचालित फ्लोटिंग हट्स के खिलाफ आंदोलन किया था। फ्लोटिंग हट्स की गंदगी टिहरी झील में डाले जाने के विरोध में स्थानीय निवासी हट्स को बंद कराने की मांग कर रहे थे।
पूर्व में फ्लोटिंग हट का किचन हुआ था सील
टिहरी झील में ली राय कंपनी की तरफ से पीपीपी मोड में संचालित फ्लोटिंग हट्स के एक कर्मचारी ने ही अक्टूबर 2022 में इंटरनेट मीडिया पर फ्लोटिंग हट्स से निकलने वाली सीवर के पानी को झील में डालने का वीडियो प्रसारित किया था।
जिसके बाद 7 अक्टूबर 2022 को जिला प्रशासन टिहरी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने टिहरी झील में पीपीपी मोड में संचालित फ्लोटिंग हट्स का निरीक्षण किया था।
तब यहां सीवर व किचन से निकलने वाले गंदे पानी का निस्तारण सही नहीं पाया गया था। सीवर निस्तारण न होने के कारण किचन सील किया गया था।
इन्होंने लगाए गंभीर आरोप
उत्तरायणी समिति के अध्यक्ष और गंगा-भागीरथी बोट यूनियन के संयोजक कुलदीप पंवार ने आरोप लगाए कि कंपनी की ओर से नियमों की अनदेखी की जा रही है।
बताया कि मई-जून-जुलाई में हर साल तूफान आता है। हालांकि, बीते वर्षों में 2 से 3 मीटर ही तूफान आया। इस वर्ष करीब 5 मीटर तूफान आया। जेटी टूटने का कारण कंपनी की ओर से इसकी नियमित मरम्मत नहीं कराया जाना है।
जिसके चलते तूफान में जेटी का नेट टूट गया। हालांकि, कोई बड़ा हादसा होने से टल गया। बताया कि जेटी की नियमित रिपेयरिंग कराई जानी जरूरी होती है।
फ्लोटिंग हट्स में जेटी कैसे टूटी यह जांच का विषय है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम के साथ स्थलीय जांच की जाएगी। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
– सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, टिहरी।









