
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर राजाजी टाइगर रिजर्व में बना एलिवेटेड कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए वरदान है।
देहरादून। विकास और पर्यावरण के बीच अक्सर द्वंद्व रहा है, लेकिन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना एलिवेटेड कारिडोर इस बहस को नया व सुखद मोड़ दे रहा है।
राजाजी टाइगर रिजर्व व शिवालिक रेंज के जंगल से गुजरता यह कारिडोर कंक्रीट का ढांचाभर नहीं, बल्कि बेजबानों की आजादी का ग्रीन पास है।
जैवविविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के दृष्टिकोण से यह प्राकृतिक हीलर की तरह है। इस कारिडोर ने राजाजी व शिवालिक के फेफड़ों को पूरी क्षमता से सांस लेने की आजादी दे दी है।

आनुवांशिक अलगाव का अंत
जंगल से गुजरने वाली कोई भी सड़क उसे दो हिस्सों में बांटती है तो वन्यजीव भी बंट जाते हैं। सड़क पर वाहनों की रेलमपेल से वन्यजीव आर-पार नहीं जा पाते।

ऐसे में अंत:प्रजनन का खतरा बढ़ता है और आनुवांशिक विविधता कमजोर होने लगती है। इसी के दृष्टिगत दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर उत्तराखंड की सीमा में गणेशपुर से डाटकाली तक एलिवेटेड रोड तैयार हुई।
इसके नीचे जंगल फिर से एक हो गया है। वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण से उनकी संतति अधिक स्वस्थ और आनुवांशिक रूप से मजबूत होगी।

खाद्य शृंखला का संतुलन
पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती उसकी खाद्य शृंखला पर निर्भर करती है। जंगल से सड़क गुजरने के कारण वन्यजीवों के शिकार व दुर्घटनाओं की आशंका रहती है।
इस कारिडोर के नीचे वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही से शिकारी व शिकार (प्रिडेटर-प्रे) का प्राकृतिक संतुलन बना है। शाकाहारी जीवों को नए चरने के मैदान मिलेंगे और मांसाहारी जीवों को उनके पीछे जाने का रास्ता।

सूक्ष्म वासस्थल और कीट-पतंगों का संरक्षण
पारिस्थितिकी तंत्र की नींव सूक्ष्म जीवों, सरीसृप और कीट-पतंगों पर टिकी होती है। इस दृष्टि से देखें तो कारिडोर के नीचे घास, झाड़ियां और नमी रहेगी। यह तितलियों, मधुमक्खियों समेत रेंगने वाले जीवों के लिए गलियारे की तरह काम करेगा, जो परागण व मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मददगार होगा।
निर्बाध जल निकासी
सड़कें अक्सर बरसाती नालों और प्राकृतिक जलधाराओं के मार्ग में बाधक बनती हैं। इससे मिट्टी का कटाव होने के साथ ही जलस्तर भी गिरता है। एलिवेटेड रोड के नीचे ऐसी कोई दिक्कत नहीं आएगी और जलधाराएं निर्बाध रूप से बहेंगी।
शून्य होंगी मानवीय गतिविधियां
एलिवेटेड रोड से 12 किमी के इस संवेदनशील क्षेत्र के जंगल में मानवीय दखल शून्य हो जाएगा। इससे जंगल में घुसपैठ और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदूषित करने की समस्याओं का निदान होगा।
यह एलिवेटेड रोड राजाजी व शिवालिक के पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करने वाला हरित पुल है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही तो सुगम हुई है, पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा।
-राजीव भरतरी, सेवानिवृत्त, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, उत्तराखंड









