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Big Breaking:-उत्तराखंड में स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग पर जोर, आयोग ने टैरिफ में दी विशेष छूट

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया रिटेल टैरिफ जारी किया है, जिसमें स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग पर विशेष जोर दिया गया है।

देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रिटेल टैरिफ जारी करते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग को केंद्र में रखा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता प्रीपेड (स्मार्ट) मीटरिंग प्रणाली अपनाएंगे, उन्हें बिजली दरों में सीधा लाभ मिलेगा और भविष्य की बिजली व्यवस्था इसी दिशा में विकसित की जाएगी।

आयोग के अनुसार, प्रीपेड मीटरिंग अपनाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में चार प्रतिशत और अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को तीन प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगी जिनके यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित और संचालित हो चुके होंगे।

सबसे बड़ी राहत यह है कि प्रीपेड मीटर आधारित आपूर्ति में किसी प्रकार का सुरक्षा जमा (सिक्योरिटी डिपोजिट) नहीं लिया जाएगा। पहले से जमा सुरक्षा राशि को उपभोक्ताओं के प्रीपेड रिचार्ज में समायोजित किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं पर प्रारंभिक वित्तीय बोझ कम होगा और डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।

आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और हर तिमाही प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए। साथ ही उपभोक्ताओं के लिए मोबाइल एप के उपयोग और स्मार्ट मीटर डेटा की समझ को बढ़ाने के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

ग्रीन टैरिफ लागू

नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए 0.39 प्रति यूनिट अतिरिक्त ग्रीन टैरिफ स्वीकृत। इसके अलावा पीक समय में 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क पूर्ववत लागू रहेगा। सौर वाटर हीटर पर भी राहत दी गई है। हर 50 लीटर क्षमता पर 75 की छूट जारी रखी गई। इसके अलावा मौसमी उपभोक्ताओं के लिए राहत देते हुए आफ-सीजन में कम उपयोग करने वाले होटल/रेस्तरां को न्यूनतम मांग के आधार पर शुल्क में राहत।

पीटीडब्ल्यू उपभोक्ताओं के लिए बदलाव करते हुए अब अर्धवार्षिक की जगह त्रैमासिक बिलिंग व्यवस्था लागू। ऊर्जा निगम के निदेशक मंडल द्वारा त्रैमासिक समीक्षा और आयोग को नियमित रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। पहली बार आयोग की ओर से शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणी में बदलाव किया गया है। 10 किलोवाट तक रियायती टैरिफ जारी करते हुए उससे अधिक भार वाले शैक्षणिक संस्थान सामान्य श्रेणी में शामिल कर दिए गए हैं।

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