
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण व कब्जों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
नगर निगम में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जे केवल विकास कार्यों में बाधा नहीं बनते, बल्कि प्रदेश की जनसांख्यिकीय संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी असर डालते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई है।
उन्होंने नगर निकाय और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखने के लिए नियमित निगरानी करें।
मुख्यमंत्री ने मालदेवता, टपकेश्वर व मसूरी मार्ग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में अतिक्रमण गंभीर चुनौती बना हुआ है।
नदी किनारे कब्जों पर विशेष नजर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी-नालों के किनारे बने अवैध ढांचे बरसात में जल प्रवाह रोकते हैं। इससे आपदा के दौरान नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों की सूची बनाकर प्राथमिकता से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड के सांस्कृतिक स्वरूप और पारंपरिक पहचान के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा। अतिक्रमण को केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा विषय बताया।









