
नैनीताल हाई कोर्ट ने कम लंबाई के कारण महिला अभ्यर्थी अनुप्रिया राय को आइपीएस कैडर न मिलने के मामले में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।
अनुप्रिया ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 189वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन 147 सेमी लंबाई के कारण उन्हें आइपीएस नहीं दिया गया। कोर्ट ने एक आईपीएस पद खाली रखने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी।
नैनीताल: हाई कोर्ट ने महिला अभ्यर्थी को लंबाई कम होने पर आइपीएस के लिए उपयुक्त नहीं मानने से संबंधित मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय सहित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिकल बोर्ड चेयरमैन व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई को 11 फरवरी को होगी।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में चंपावत के लोहाघाट निवासी अनुप्रिया राय की याचिका पर सुनवाई हुई। अनुप्रिया के अनुसार वह सिविल सेवा परीक्षा 2024 में शामिल हुईं और अखिल भारतीय स्तर पर 189वीं रैंक प्राप्त की। उनकी पहली पसंद भारतीय पुलिस सेवा थी, लेकिन कम लंबाई के कारण उन्हें यह नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा 2024 के अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच से संबंधित नियम 8 (3) को प्रतिवादी अधिकारियों ने गलत तरीके से पढ़ा है और याचिकाकर्ता को नियमों का लाभ देने से मना कर दिया है।
यूपीएससी के नियमों के अनुसार आइपीएस में महिला अभ्यर्थी की न्यूनतम लंबाई 150 सेमी होनी चाहिए। याचिकाकर्ता की लंबाई 147 सेमी है।
याचिकाकर्ता के अनुसार यूपीएससी ने गोरखा, कुमाऊंनी सहित अन्य जनजातियां का होने के आधार पर लंबाई में पांच सेमी छूट का प्रविधान रखा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया था कि सिविल सेवा परीक्षा 2024 के आइपीएस कैडर का एक पद खाली रखा जाए, लेकिन अब मूल आवेदन पर निर्णय हो चुका है।
इसलिए मामले के निपटारे तक आगे अंतरिम आदेश की आवश्यकता है। खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक सिविल सेवा परीक्षा 2024 में भारतीय पुलिस सेवा का एक पद खाली रखने के निर्देश दिए हैं।







