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Big Breaking:-सरकारी स्कूल में लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा भोजन, सिलिंडर को हेडमास्टर लगा रहे एजेंसियों की दौड़

रुड़की के प्राथमिक विद्यालयों और मदरसों में मिड डे मील के लिए गैस सिलिंडर की कमी हो गई है। कई स्कूलों में अब बच्चों का भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है।

रुड़की। प्राथमिक विद्यालयों और मदरसों में मिड डे मील के लिए गैस सिलिंडर की किल्लत सामने आने लगी है।

कई स्कूलों में बच्चों का भोजन अब लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जा रहा है, जबकि प्रधानाध्यापक सिलिंडर की बुकिंग के लिए एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।

अधिकारियों के दावे भले ही व्यवस्था दुरुस्त होने के हों, लेकिन जमीनी हालात इससे भिन्न हैं।

रुड़की ब्लाक क्षेत्र के विद्यालयों में मिड डे मील व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है। क्षेत्र में करीब 106 प्राथमिक विद्यालय और लगभग 20 मदरसे संचालित हैं, जहां सैकड़ों बच्चों को प्रतिदिन मिड डे मील दिया जाता है।

लेकिन, इन दिनों गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई जगहों पर भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाना पड़ रहा है।

रुड़की ब्लाक के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि कई दिनों से गैस सिलिंडर की बुकिंग कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फोन पर बुकिंग नहीं हो रही।

मजबूरी में एजेंसी पर जाकर बुकिंग करानी पड़ती है और वहां भी लंबी लाइन का सामना करना पड़ता है। इससे समय की काफी बर्बादी होती है और स्कूल के अन्य कार्य प्रभावित होते हैं।

इसी कारण कई विद्यालयों में भोजनमाता को लकड़ी के चूल्हे पर ही मिड डे मील तैयार करना पड़ रहा है।

पुराने तरीके से भोजन बनाने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है। साथ ही धुएं के कारण रसोई में काम करना भी मुश्किल हो जाता है।

रामपुर चुंगी के पास स्थित एक बड़े मदरसे में आज भी लकड़ी के चूल्हे पर ही मिड डे मील पकाया जा रहा है।

विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस की आपूर्ति नियमित नहीं होने के कारण उन्हें एहतियात के तौर पर लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय नंबर 12 व 14 में भी भोजनमाता लकड़ी के चूल्हे पर मिड डे मील तैयार कर रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड डे मील योजना बच्चों के पोषण और उनकी स्कूल में नियमित उपस्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यदि भोजन बनाने की व्यवस्था ही प्रभावित होने लगेगी तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर पड़ सकता है।

हालांकि, जमीनी स्तर पर कई विद्यालयों में जो स्थिति सामने आ रही है, वह अधिकारियों के दावों से अलग नजर आ रही है।

ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या का कितना जल्दी समाधान करता है, ताकि स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

जिले के सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि मिड डे मील के लिए गैस सिलिंडर की कमी हो तो तुरंत ब्लाक कार्यालय से संपर्क करें। फिर भी यदि कहीं लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी और समस्या का समाधान किया जाएगा।

– अजय कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार

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