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Big Breaking:-आज से देहरादून की हवा पर 24 घंटे पहरा, 15 दिन होगी प्रदूषण की निगरानी

उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दीपावली पर आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण की निगरानी 1 नवंबर से शुरू करेगा।

देहरादून। दीपावली पर आतिशबाजी से दून की हवा में कितना प्रदूषण घुलता है और त्योहार के बाद वायु गुणवत्ता सामान्य होने में कितना समय लगता है, इसका पता लगाने के लिए उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक नवंबर यानी शनिवार से विशेष निगरानी अभियान शुरू करने जा रहा है।

इसके तहत देहरादून समेत ऋषिकेश और टिहरी में हवा की गुणवत्ता की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। दीपावली से सात दिन पहले और दीपावली के बाद सात दिन तक यह निगरानी जारी रहेगी। इसके लिए थर्ड पार्टी के रूप में ग्रीन एनवायरो टेक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और सेंटर फार एनवायरनमेंट एंड फूड टेक्नोलाजी का चयन किया गया है।

अतिरिक्त प्रदूषण का आकलन

क्षेत्रीय अधिकारी नरेश गोस्वामी के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संबंध में पहले ही क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए थे। निगरानी का उद्देश्य केवल दीपावली की रात प्रदूषण के स्तर का पता लगाना नहीं, बल्कि सामान्य दिनों की तुलना में आतिशबाजी के कारण हवा में होने वाले अतिरिक्त प्रदूषण का आकलन करना भी है।

इसके लिए चार प्रमुख वायु प्रदूषकों के साथ हवा में मौजूद धातुओं की उपस्थिति की भी जांच की जाएगी। इनमें पीएम-10, पीएम-2.5, सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड शामिल हैं। इनकी मात्रा के आधार पर वायु गुणवत्ता सूचकांक तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण की स्थिति भी दर्ज की जाएगी, ताकि दीपावली से पहले, त्योहार की रात और उसके बाद ध्वनि के स्तर में होने वाले बदलाव का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।

इन चार प्रदूषकों पर रहेगी खास नजर

हवा में प्रदूषण की जांच के दौरान पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर को विशेष महत्व दिया जाएगा। पीएम-10 में धूल और दूसरे अपेक्षाकृत बड़े सूक्ष्म कण शामिल होते हैं, जबकि पीएम-2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं।

पटाखों से निकलने वाला धुआं इन कणों की मात्रा बढ़ा सकता है। इसके अलावा सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड जैसी गैसों की भी जांच होगी। ये गैसें सांस संबंधी परेशानी बढ़ाने के साथ वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

देहरादून के दो और ऋषिकेश-टिहरी में एक-एक स्थल पर निगरानी

पिछले वर्ष की तरह इस बार भी निगरानी के दायरे में टिहरी को शामिल किया गया है। देहरादून में घंटाघर और नेहरू कालोनी सहित दो स्थलों पर तथा ऋषिकेश और टिहरी में एक-एक स्थल पर वायु गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इन स्थानों से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

इन पैरामीटर पर जांच, यह है मानक

  • पीएम 10, 24 घंटे में अधिकतम मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए।
  • पीएम 2.5, 24 घंटे में अधिक मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए।
  • सल्फर डाईआक्साइड (साक्स), 24 घंटे में अधिकतम 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर
  • नाइट्रोजन डाईआक्साइड, 24 घंटे में अधिकतम मात्रा 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर।

पिछले वर्षों के आंकड़े बता रहे प्रदूषण में कमी का रुझान

दीपावली पर पटाखों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ना चिंता का विषय रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों में कुछ राहत देने वाला रुझान भी दिखाई देता है।

पिछली कुछ दीपावली में वायु प्रदूषण की स्थिति (एक्यूआई में)

  • वर्ष, घंटाघर, नेहरू कालोनी, ऋषिकेश
  • 2025, 254, 230, 135
  • 2024, 288, 243, 173
  • 2023, 333, 349, 196
  • 2022, 252, 242, 236
  • 2021, 248, 306, 257
  • 2020, 317 (एक ही स्थल), 198

एक्यूआई के मुताबिक हवा का हाल

  • शून्य से 50, अच्छा
  • 51 से 100, संतोषजनक
  • 101 से 200, मध्यम
  • 201 से 300, बुरी
  • 301 से 400 बहुत बुरी
  • 401 व अधिक, अति गंभीर
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