
नैनीताल हाई कोर्ट ने लोक निर्माण और सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन रोकने के वित्त विभाग के आदेश पर रोक लगा दी है। लगभग दस हजार सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के बावजूद पेंशन बंद की गई, जबकि पहले लाभ मिल रहा था।
नैनीताल। हाई कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन से बाहर किए जाने वाले वित्त विभाग के आदेश पर रोक लगा दी है। बीते दिवस कोर्ट ने राज्य सरकार को स्थिति साफ करने के निर्देश दिए थे।
राज्य में ऐसे वर्कचार्ज नियमित सेवारत व रिटायर कर्मचारियों की संख्या करीब दस हजार है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 1980 से 2025 तक कार्यरत रहे सेवानिवृत्त कर्मियों व उनके मृतक आश्रितों को पेंशन व अन्य देयकों का भुगतान किया जा रहा था, जिसे बंद कर दिया गया।
गुरुवार को अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ में सेवानिवृत्त कर्मचारी राम सिंह सैनी व अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कहा गया है कि 16 जनवरी को वित्त विभाग के कार्यालय आदेश के अनुसार पहली अक्टूबर 2005 के बाद रेगुलर वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन के दायरे से बाहर कर दिया गया। यह कर्मचारी 2021-22 में सेवानिवृत्त हुए थे, इनको पेंशन का लाभ दिया जा रहा था।
इन कर्मचारियों को 2018 के सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में पारित आदेश के 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने नियमित किए गए कर्मियों के वर्कचार्ज सेवा को जोड़ते हुए उन्हें पेंशन समेत अन्य लाभ दिए जाने का आदेश दिया था, अब शासन की ओर से मनमाना आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से पेंशन बंद कर दी गई, साथ ही कहा था कि जो कर्मचारी सेवारत हैं, उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना से जोड़ा जाएगा।








