Big Breaking:-खतरे में हिमालय के ग्लेशियर: क्यों खिसक रहा पिंडारी? आज भी दिख रहे 2013 आपदा के निशान, पूरी रिपोर्ट

गोविंद बल्लभ पंत संस्थान के सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि पिंडारी ग्लेशियर 100 साल में लगभग ढाई किमी पीछे खिसक गया है, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गंभीर चिंता बढ़ गई है।

बागेश्वर। पिंडारी ग्लेशियर पिछले 100 वर्ष में लगभग ढाई किमी पीछे खिसक गया है। जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल, अल्मोड़ा के ईआईएसीपी केंद्र की टीम ने पिंडारी ग्लेशियर भू-क्षेत्र का पर्यावरणीय सर्वेक्षण किया जिसके बाद यह स्थिति सामने आई है।

पांच सदस्यीय टीम 24 से 28 अप्रैल तक पिंडारी ग्लेशियर में रही। कार्यक्रम अधिकारी डा. महेशानंद ने बताया कि पांच दिनों तक उन्होंने ग्लेशियर पर अध्ययन किया। ग्लेशियर लगातार खिसक रहे हैं। यह चिंता का विषय है। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण यहां समय-समय पर तीव्र वर्षा होती रहती है, जिससे भूमि कटाव की समस्या बढ़ रही है।

इस चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग ने विभिन्न स्थानों पर नारियल की रस्सियों से बने जाल लगाए हैं, ताकि मृदा क्षरण तथा भू-कटाव को रोका जा सके। वरिष्ठ सलाहकार डा. रविंद्र जोशी, सूचना अधिकारी इं. कमल टम्टा, डाटा इंट्री हेम तिवारी तथा केरला के मनीष टीम में शामिल थे।

गढ़वाल तथा कुमाऊं के लिए पिंडर नदी महत्वपूर्ण

पिंडर नदी कुमाऊं तथा गढ़वाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण नदी है। इसका संगम कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी से होता है, जो आगे देवप्रयाग में भागीरथी से मिलकर गंगा के रूप में प्रवाहित होती है। पर्यावरणीय दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत समृद्ध है।

यहां भालू, कस्तूरी मृग, भरल, मोनाल, हिमालयी तीतर तथा विभिन्न प्रकार की बुरांश प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा उतीस, किल्मोड़ा, स्याऊ, रिंगाल, बांज तथा अयार जैसी वनस्पतियां भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जो इसकी समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती हैं।

आपदाओं से पहुंचा ट्रैक रूट को नुकसान

वर्ष 2013 की आपदा के निशान आज भी इस क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। उस समय हुए भूस्खलन से ट्रेक मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा था। विशेष रूप से कफनी और पिंडारी ग्लेशियर के संगम पर स्थित द्वाली क्षेत्र लगातार हो रहे भू-कटाव के कारण भविष्य में गंभीर संकट का सामना कर सकता है।

पिंडारी ग्लेशियर से जीरो प्वाइंट की दूरी

पिंडारी ग्लेशियर तक पहुंचने के लिए बागेश्वर से खाती तक लगभग 50 किमी की दूरी तय करनी होती है। इसके बाद खाती से द्वाली 12 किमी, द्वाली से फुरकिया छह किमी तथा फुरकिया से पिंडारी ग्लेशियर जीरो प्वाइंट तक आठ किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

क्षेत्र की जैव विविधता तथा प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए पर्यटन को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए ट्रेक मार्गों की मरम्मत, शौचालयों का समुचित रखरखाव, सूचना पट्टों का पुनर्स्थापन तथा पर्यटकों के लिए सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश तथा चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था जरूरी है। – डा. रविंद्र जोशी, वरिष्ठ सलाहकार

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