कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और 2008 बैच के IFS अधिकारी साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का फैसला किया है.
देहरादून: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और 2008 बैच के आईएफएस अधिकारी साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का फैसला किया है. साल 2037 में सेवानिवृत्त होने वाले बडोला ने करीब 11 साल पहले ही सेवा छोड़ने की घोषणा की है. उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी दी और व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया.
राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके साकेत बडोला के कार्यकाल में कुछ मामले काफी चर्चाओं में रहे हैं, जिसमें राजाजी में वनकर्मियों की दुर्घटना का बड़ा मामला शामिल है.
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और भारतीय वन सेवा (IFS) के 2008 बैच के अधिकारी साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का फैसला किया है. उनका यह निर्णय वन विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि बडोला की नियमित सेवानिवृत्ति में अभी लंबा समय बाकी था. उन्हें साल 2037 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन इससे करीब 11 साल पहले ही उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया है.
लंबे समय से चल रही थी VRS की चर्चा: साकेत बडोला के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की चर्चाएं पिछले काफी समय से चल रही थीं. हालांकि वन विभाग और अधिकारी के स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही थी. अब बडोला की ओर से खुद इसकी जानकारी साझा किए जाने के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया है. हालांकि उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है. ऐसे में उनके सेवा छोड़ने के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है.
राजाजी से कॉर्बेट तक संभाली अहम जिम्मेदारी: साकेत बडोला उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय वन सेवा के अधिकारी के रूप में प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. राज्य में धामी सरकार के कार्यकाल के दौरान भी उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया.
वन विभाग में फील्ड अधिकारी के तौर पर अहम माने जाने वाले राजाजी टाइगर रिजर्व से लेकर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व तक की जिम्मेदारी उनके पास रही है. दोनों ही टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं.
कार्यकाल के दौरान चर्चा में रहे विवादित मामले: साकेत बडोला की महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती के दौरान कुछ विवादित मामले भी सुर्खियों में रहे. राजाजी टाइगर रिजर्व में इलेक्ट्रिक वाहन ट्रायल के दौरान वाहन पलटने की घटना में कई वनकर्मियों की मौत हो गई थी. घटना के समय बडोला राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक थे. इस मामले की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले एक वरिष्ठ वन अधिकारी का अचानक VRS लेने का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है.
फिलहाल बडोला के इस फैसले के बाद वन विभाग में चर्चाएं तेज हैं. उनके आगे की योजनाओं और सेवा छोड़ने के निर्णय के पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है. इस मामले में अब तक हालांकि कोई कागजी कार्रवाई शासन तक नहीं पहुंची है. प्रमुख सचिव वन आर के सुधांशु कहते हैं कि मौखिक रूप से उन्हें यह जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक इसके लिए आवेदन से जुड़ा कोई औपचारिक दस्तावेज उन तक नहीं पहुंचा है.



