
देहरादून। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लाख दावों के बीच हकीकत आज सचिव स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार के औचक निरीक्षण में खुलकर सामने आ गई।
शुक्रवार को जब सचिव दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां के हालात देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
अस्पताल के जिन गलियारों और कमरों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और अत्याधुनिक सुविधाओं का दावा किया जाता है, वहां टूटे-फूटे शीशे, जर्जर व्यवस्था दिखाई दीं।
निरीक्षण के दौरान सचिव की नजरें जब टूटे हुए कांच और लापरवाही से लगे उपकरणों पर पड़ीं, तो वे खुद को संयत नहीं रख पाए।
हालांकि, मौजूद स्टाफ और महिला अधिकारियों की उपस्थिति के चलते उन्होंने गुस्से पर काबू जरूर रखा, लेकिन उनके चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी।
डॉ. राजेश कुमार ने साफ कहा कि जब सरकार हर साल करोड़ों रुपए का बजट स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर खर्च कर रही है, तो जमीनी हकीकत इतनी बदहाल क्यों है?
सचिव ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाबतलब किया और अस्पताल प्रशासन को चेतावनी दी कि लापरवाही अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।टूटे कांच और दरवाजों से मरीजों और स्टाफ दोनों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। सचिव ने इन सभी खामियों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल राज्य का प्रमुख अस्पताल है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां की दुर्दशा यह साबित कर रही है कि सिस्टम में निगरानी और जवाबदेही का गंभीर अभाव है।
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारना सरकार की प्राथमिकता है और लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के बाद उन्होंने निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर अस्पताल प्रशासन खामियों को दूर कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।