
बिल्डर शाश्वत गर्ग निवेशकों और बैंकों के करोड़ों रुपये हड़पकर विदेश फरार हो गया है, जबकि पीड़ित न्याय के लिए भटक रहे हैं। रेरा ने गर्ग की आर्केडिया हिलाक्स और इंपीरियल वैली परियोजनाओं पर रोक लगाई थी।
अब इंपीरियल वैली में भी धोखाधड़ी सामने आई है, जहाँ एग्रीमेंट किसी और से कर रजिस्ट्री दूसरों के नाम की गई। पुलिस और ईडी गर्ग परिवार की तलाश कर रहे हैं।
देहरादून। निवेशकों और बैंकों के करोड़ों रुपये हड़पकर परिवार समेत फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग खुद विदेशी धरती पर मौज काट रहा और यहां पीड़ित निवेशक न्याय की आस में दर-ब-दर धक्के खा रहे हैं।
गर्ग की कंपनी गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर शिकंजा कसते हुए उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारटी (रेरा) ने मसूरी रोड स्थित आर्केडिया हिलाक्स सोसाइटी में फ्लैट बिक्री एवं रायपुर थानो स्थित इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट की प्लाटिंग पर रोक तो लगा दी थी, लेकिन अब इंपीरियर वैली में बड़ा धोखा सामने आया है।
बताया जा रहा है कि गर्ग परिवार ने यहां जमीनों के एग्रमेंट तो किसी और के साथ किए थे और फरार होने से पहले दूसरे लोगों के नाम रजिस्ट्री करा दी। यानी, एग्रीमेंट वाले से भी रुपये लिए और दूसरे खरीदार से भी। अब निवेशकों ने जमीनों के म्यूटेशन पर रोक लगाने की अर्जी दी है।
आर्केडिया हिलाक्स परियोजना में निवेशकों को फ्लैट आवंटन व फर्जी तरीके से बैंक लोन लेकर करोड़ों रुपये हड़पकर फरार बिल्डर शाश्वस्त गर्ग, पत्नी साक्षी और शास्वस्त के पिता प्रवीण गर्ग विरुद्ध पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर दिसंबर में जारी कर दिया था। तीनों आरोपितों के पासपोर्ट भी निरस्त किए जा चुके हैं।
उनकी तलाश में राजपुर पुलिस व स्पेशल आपरेशन ग्रुप को लगाया गया है। आरोपितों के नेपाल भागने के कुछ प्रमाण तो जरूर मिले थे, लेकिन इसके बाद किस देश में छुपे हैं, जांच एजेंसियां अब तक इसका पता लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं।
बता दें कि, बिल्डर शाश्वस्त गर्ग पत्नी साक्षी, बेटे रिद्वान, पिता प्रवीण गर्ग और मां अंजली के साथ गत 17 अक्टूबर से गायब हैं। गर्ग परिवार को आखिरी बार शाश्वत के साले सुलभ गोयल के हापुड़ उत्तर प्रदेश स्थित घर पर देखा गया था।
आर्केडिया हिलाक्स ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में 21 से अधिक फ्लैट आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतों पर पुलिस गर्ग परिवार के साथ ही उनके दो सालों और कुछ बैंक व वित्तीय संस्थानों के विरुद्ध पहले ही मुकदमा दर्ज कर चुकी है। गत 20 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी बिल्डर शाश्वत व साक्षी गर्ग के विरुद्ध मनी लाड्रिंग में मुकदमा दर्ज किया था।
अब पुलिस के साथ ईडी भी आरोपितों की तलाश कर रही है। ब्यूरो आफ इमीग्रेशन ने तीनों आरोपितों शाश्वस्त, साक्षी व प्रवीण गर्ग के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी किया हुआ है। इससे आरोपितों के किसी अन्य देश जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है, लेकिन नेपाल से भागने के बाद फिलहाल वह किस देश में हैं, यह अब तक किसी को नहीं पता। पुलिस की जांच में देरी के कारण अब निवेशकों की बैचैनी भी बढ़ रही है और वह धक्के खाने को मजबूर हैं।
न रजिस्ट्री हुई न मिला पैसा, लोन अलग चल रहा
आर्केडिया हिलाक्स सोसाइटी को लेकर रेरा में गोल्डन एरा इंफ्राटेक के निदेशक शाश्वत गर्ग, उनके पिता अतुल गर्ग, मां अंजलि गर्ग, चाचा प्रतीक गर्ग व अन्य निदेशकों के विरुद्ध नौ शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें फ्लैट की बुकिंग के बावजूद समय पर रजिस्ट्री न कराने के आरोप हैं।
शिकायतकर्ता राजेंद्र सिंह नकोटी, चैतन्य बहुगुणा, कुंवर पाल सिंह, अमित राणा, मणि महेश एग्रोटेक, विजया देवी कौडिया, अमित राणा, रणवीर पुरी और अशिमा अग्रवाल के अनुसार वह फ्लैटों का पूरा भुगतान कर चुके हैं, कब्जा भी प्राप्त हो चुका है, इसके बावजूद रजिस्ट्री अब तक नहीं हुई है। उनके लोन की किश्तें अलग जा रहीं। फ्लैट की बिक्री पर भले रेरा रोक लगा चुका है, पर रजिस्ट्री न होने से वह अब तक फ्लैट के मालिक भी नहीं बन पाए हैं।
इंपीरियल वैली के निवेशक आ रहे सामने
गर्ग परिवार ने दून में दो आवासीय परियोजनाओं पर काम शुरू किया था। इनमें एक मसूरी रोड पर आर्केडिया हिलाक्स (ग्रुप हाउसिंग) व दूसरी परियोजना इंपीरियल वैली (थानो में प्लाटेड डेवलपमेंट) नाम से है। बिल्डर के गायब होने के बाद रेरा ने इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट में खरीद फरोख्त पर रोक लगाई हुई है।
अब इंपीरियल वैली के वह निवेशक सामने आए हैं, जिनके साथ एग्रीमेंट कर रजिस्ट्री दूसरे के नाम पर करा दी गई। इन पीड़ितों ने एफआइआर का ड्राफ्ट तैयार करा लिया है। इस मामले में पहले भी रानीपोखरी थाने में रीना पाल ने गर्ग परिवार पर मुकदमा कराया हुआ है।









