
देहरादून के आईएसबीटी पर 80 करोड़ की लागत से बने फोरलेन फ्लाईओवर पर जिला प्रशासन के एक प्रयोग ने यातायात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मुख्य फ्लाईओवर की एक लेन को संकरा कर वाई-शेप फ्लाईओवर से जोड़ा गया है,
जिससे वाहनों की आवाजाही में दिक्कत हो रही है। इस प्रयोग से जाम, चालकों में भ्रम और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। 90 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या जस की तस है।
देहरादून। राजधानी दून में बल्लीवाला और बल्लूपुर जैसे संकरे फ्लाईओवर की आफत में थोड़ा सुकून इस बात का था कि आईएसबीटी पर फोरलेन फ्लाईओवर बनाया गया है। दिसंबर 2016 में 50 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से जनता को समर्पित किए गए फ्लाईओवर से नागरिकों को काफी राहत भी मिली।
लेकिन, जिला प्रशासन के एक प्रयोग ने इसका गला भी घोंट दिया है। आईएसबीटी चौक पर व्यवस्था बनाने और मुख्य फ्लाईओवर से जुड़े वाई-शेप फ्लाईओवर की उपयोगिता बढ़ाने के नाम पर ऐसा प्रयोग किया गया कि अब फोरलेन फ्लाईओवर से गुजरना भी किसी आफत से कम नहीं।
जिला प्रशासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने आईएसबीटी के फोरलेन फ्लाईओवर की देहरादून के छोर वाली बाईं लेन के करीब आधे हिस्से को दो भागों में बांटकर सिंगल लेन कर दिया है। यह प्रयोग उस हिस्से तक किया गया है,
जहां पर वाई शेप फ्लाईओवर मुख्य फ्लाईओवर से जुड़ रहा है। जिसका मकसद यह है कि डबल लेन से ही बनाई गई अतिरिक्त लेन से वाहन वाई शेप फ्लाईओवर से हरिद्वार बाईपास रोड की तरफ रुख कर सकें।
पहले वाई शेप फ्लाईओवर की तरफ जाने की व्यवस्था नहीं था। यह फ्लाईओवर महज डबल लेन का है, इसलिए इससे वाहन सिर्फ हरिद्वार बाईपास रोड की तरफ से आ सकते थे। अब न सिर्फ मुख्य फ्लाईओवर की डबल लेन से एक अतिरिक्त सिंगल लेन निकाली गई,
बल्कि वाई शेप फ्लाईओवर को भी दोनों तरफ के वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया गया। अब स्थिति यह है कि मुख्य फ्लाईओवर की एक लेन संकरी हो गई है और डबल लेन फ्लाईओवर की एक एक लेन के दो भागों में बंट गया है। जिस कारण राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े इन फ्लाईओवर पर आवागमन चुनौतीपूर्ण हो गया है।
फोरलेन फ्लाईओवर के आरंभ में बनाई चौखट, असमंजस में पड़ रहे चालक
चूंकि, अब फ्लाईओवर संकरे हो गए हैं, लिहाजा बाईं लेन से बड़े वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए चौखटनुमा गेट बना दिया गया है। इसके छोटे आकार के कारण बड़े वाहन तो रुख नहीं कर रहे हैं, लेकिन सहारनपुर रोड की तरफ रुख करने वाले छोटे वाहन असमंजस में पड़ रहे हैं।
तमाम वाहन आए दिन गफलत में गेट वाले भाग पर बनाई गई अतिरिक्त लेन में घुस रहे हैं, जबकि उन्हें सहारनपुर की तरफ रुख करना होता है। ऐसे में कुछ मीटर आगे चलकर वह न सिर्फ रुक जाते हैं, बल्कि उनके मुड़ने के लिए भी जगह नहीं बच पाती। ऐसी स्थिति में वाहन चालक सरकारी मशीनरी के अटपटे प्रयोग को कोसते नजर आते हैं।
हरिद्वार बाईपास रोड की तरफ उतरते ही दुर्घटना का खतरा
फोरलेन फ्लाईओवर की एक लेन को संकरा करते हुए निकाली गई अतिरिक्त लेन से जब वाहन वाई शेप फ्लाईओवर से होते हुए हरिद्वार बाईपास रोड की तरफ रुख कर रहे हैं तो एक और खतरा नजर आता है।
फ्लाईओवर की एप्रोच रोड से बाहर निकलते हुए वाहनों को हल्का बाईं तरफ मुड़ना पड़ता है। तरह वाहन नीचे सर्विस लेन से आने वाले भारी वाहनों की जद में आ जाते हैं। क्योंकि, सर्विस लेन का आकार भी कम है। ऐसे में जरा सी चूक बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
आईएसबीटी चौक से हालात जस के तस
आईएसबीटी पर फोरलेन फ्लाईओवर और वाई शेप फ्लाईओवर यह प्रयोग इसलिए कराए गए थे, क्योंकि, प्रशासन की मंशा चौक पर वाहनों का दबाव नियंत्रित करना था। हालांकि, फ्लाईओवर के नीचे के हालात जस के तस नजर आते हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि फ्लाईओवर के ऊपर हालात तो चुनौतीपूर्ण हुए ही हैं, नीचे चौक पर भी किसी तरह की राहत नहीं मिल पाई।
प्रयोग के खर्च हुए 90 लाख भुगतान अब तक नहीं हुआ
जिला प्रशासन के निर्देश पर लोनिवि ने फ्लाईओवर किए गए विभिन्न प्रयोगों और डिवाइडर आदि के लिए 90 लाख रुपए खर्च कर दिए। इस काम को करीब छह माह का समय बीत गया है। हालांकि, इसका भुगतान अभी तक नहीं किया जा सका है।
80 करोड़ के फ्लाईओवर के बाद भी चुनौती बरकरार
आईएसबीटी पर फोरलेन फ्लाईओवर में 50 करोड़ रुपए से अधिक का बजट खर्च किया गया, जबकि वाई शेप फ्लाईओवर में 29 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इतने भारी बजट के बाद भी यदि जनता को वाहनों के संचालन के लिए सिर्फ संकरे गलियारे मिलें तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।









