
उन्होंने कहा कि मदरसे खोलने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 29 और 30 से मिलता है। सरकार का यह कदम मुस्लिम समुदाय के हक पर सीधा हमला है।
उत्तराखंड सरकार के मदरसा बोर्ड को खत्म करने की चर्चा के बीच वरिष्ठ समाजसेवी एडवोकेट मोहम्मद मुबशशीर ने प्रदेश सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को असल मुद्दों से भटकाने के लिए बार-बार नए मुद्दे खड़े कर रही है।
मोहम्मद मुबशशीर ने कहा कि फिलहाल उत्तराखंड आपदा प्रभावित प्रदेश है जहाँ चारों तरफ बाढ़ और भूस्खलन जैसी समस्याएं हैं लेकिन इन गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सरकार कभी मस्जिदों पर,कभी अजान,तीन तलाक, यूसीसी, वक्फ बोर्ड और अब मदरसा बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा कर रही है।
उन्होंने कहा कि मदरसे खोलने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 29 और 30 से मिलता है। सरकार का यह कदम मुस्लिम समुदाय के हक पर सीधा हमला है। मदरसा बोर्ड को खत्म करने का फैसला किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगा।
मुबशशीर ने कहा कि उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2016 के तहत मुस्लिम समुदाय के बच्चों को आलिम,कामिल, फाजिल,फोकानिया और मुंशी जैसी शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।
प्रदेश में 500 से अधिक मदरसे संचालित हो रहे हैं जिनमें हजारों छात्र एनसीईआरटी के कोर्स के साथ पढ़ाई कर उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और सरकारी नौकरियां भी हासिल कर चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले मदरसों की मान्यता की फाइलें लंबित रखती है फिर मदरसों को सील कर देती है और अब बोर्ड को ही खत्म करने की बात कह रही है।
उन्होंने कहा कि जब स्कूलों में संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है तो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल उर्दू भाषा को क्यों नज़रअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार अगर सच में भेदभाव खत्म करना चाहती है तो एक देश, एक शिक्षा नीति लागू करे। सभी बोर्ड को खत्म कर एक ही राष्ट्रीय बोर्ड बने ताकि सभी बच्चों को समान शिक्षा मिल सके और देश तरक्की कर सके।