नई टिहरी में कलेक्ट्रेट कार्यालय से महज 100 मीटर दूर डाईजर-बुड़ोगी के जंगल में भीषण आग लग गई, जिससे शहर में धुआं फैल गया और लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई।
नई टिहरी। जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर डाईजर-बुड़ोगी के जंगल भीषण आग लगने से धू-धू कर जलने लगे। जिससे ऊपरी नई टिहरी शहर में वातावरण में धुआं-धुआं हो गया है।
टिहरी वन प्रभाग और टिहरी डैम वन प्रभाग के क्रू-स्टेशन के चारों तरफ के जंगल भी भीषण आग की चपेट में आ गए। बावजूद दोनों ही क्रू-स्टेशन की टीमें इस आग पर काबू पाने में देर शाम तक भी नाकाम रहीं।
शनिवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जिला मुख्यालय में डाईजर के नीचे जंगल में अचानक आग भड़क गई। शुरूआत में हल्का धुआं उठा, लेकिन तेज हवा के झोकों के कारण देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया।
जिसके बाद शहर में चारों ओर वातावरण में भारी मात्रा में धुआं घुल गया। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ा। लेकिन इस दौरान न तो वन विभाग के आला अधिकारियों और न ही दो-दो क्रू-स्टेशन पर तैनात वन कर्मियों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
जिसके चलते शाम होते-होते यह आग बुडोगी, डाईजर के ऊपर बसे चवालखेत गांव और बसंत विहार की आवासीय कालोनी तक आग की लपटें पहुंच गईं।
जिला मुख्यालय और कलेक्ट्रेट कार्यालय के इतने समीप आग लगने पर भी जिम्मेदार अधिकारी आग पर काबू पाने के लिए मौके पर नहीं पहुंचे, जो कि विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इससे जिला प्रशासन, वन विभाग, पुलिस, आपदा प्रबंधन और फायर ब्रिगेड की फायर सीजन के शुरू होने पर की गई माक ड्रिल और तैयारियों की भी पोल खुलती दिखी।
हालांकि आग के बेकाबू होने और ग्रामीणों व आसपास के लोगों की लगातार शिकायत व सूचनाओं के बाद प्रशासन की नींद खुली। जिसके बाद शाम करीब चार बजे वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। साथ ही अग्निशमन विभाग की सहायता से आग पर काबू पाने का प्रयास किया।
जिसमें वन विभाग व अग्निशमन टीम भी नाकाम रही। वहीं, प्रभागीय वनाधिकारी वन प्रभाग टिहरी पुनीत तोमर ने बताया कि वह स्वयं विभागीय टीम के साथ मौके पर मौजूद हैं। आग पर काबू पाने के लिए टीमें मुश्तैदी से प्रयास कर रही हैं।