उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के उत्पीड़न और धोखाधड़ी मामले में उनके पति गिरधारी अंडरग्राउंड हैं। उधर, गिरधारी लाल साहू को अदालत से भी झटका लगा है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के उत्पीड़न और धोखाधड़ी के मामले में एसआईटी अब सोमवार दोपहर बाद उनके बयान दर्ज कर सकती है। रविवार को शासकीय कार्यों में व्यस्तता के कारण मंत्री के बयान दर्ज नहीं हो पाए। वहीं, आरोपी पति गिरधारी लाल साहू के अंडरग्राउंड हो जाने से तलाश में बरेली गई पुलिस टीम खाली हाथ लौट आई।
एसआईटी प्रभारी जया बलोनी ने बताया कि उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रविवार को देहरादून आगमन के चलते पुलिस अधिकारी उनकी अगवानी और सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त रहे। सोमवार सुबह राज्यपाल का शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित है। इसमें दोपहर तक का समय लग सकता है। इसके बाद एसआईटी, मंत्री रेखा आर्या के बयान दर्ज करने की कार्रवाई कर सकती है।
उधर, साहू से पूछताछ और वीडियो व शिकायत में बताई गई कंपनियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए दून पुलिस की एक टीम बरेली गई थी। हालांकि, वहां पहुंचने पर साहू नहीं मिला और टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, घटना और मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही साहू ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर रखा है। पुलिस अब उसकी तलाश तेज करते हुए संभावित ठिकानों पर दबिश देगी। एसआईटी प्रभारी ने बताया कि मंत्री ने जिन दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात कही है, उन्हें भी बरामद कर जांच की जाएगी।
गिरधारी साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से दर्ज कराए केस में आरोपी पति गिरधारी लाल साहू को कोर्ट से झटका लगा है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) अंजली बेंजवाल की कोर्ट ने साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
पत्नी के पद के प्रभाव से गिरफ्तारी का भय जताते हुए साहू ने स्वयं कोर्ट में उपस्थित न होकर पैरोकार के माध्यम से अर्जी दाखिल की थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता विपिन जोशी और अरविन्द वशिष्ठ ने दलील दी कि 22 साल पुरानी शादी में यह पैसों से जुड़ा घरेलू विवाद है। बंद कमरे की बात सार्वजनिक स्थान की श्रेणी में नहीं आती, इसलिए एससी-एसटी एक्ट की धारा 18 व 18(ए) लागू नहीं होती।
विशेष लोक अभियोजक गोविन्द सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पीड़िता को आवास में स्टाफ के सामने अपमानजनक जातिसूचक शब्द कहे गए हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि जिस कमरे में स्टाफ के अन्य लोग मौजूद थे, वह प्रथमदृष्टया बंद कमरा नहीं बल्कि दृष्टिगोचर स्थान (पब्लिक व्यू) ही कहलाएगा। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध गठित होना पाते हुए अधिनियम की धारा 18 व 18(ए) के प्रतिबंध के चलते अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
रेखा अस्पताल से छुट्टी मिलते ही टपकेश्वर के दर पर पहुंचीं
निजी अस्पताल से छुट्टी के बाद मंत्री रेखा आर्या रविवार को दुर्गाष्टमी पर टपकेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने महादेव और मां भगवती की पूजा कर देश-प्रदेश की समृद्धि मांगी। खुद पर आई विपदा का सामना करने के लिए शक्ति का वरदान भी मांगा।
मंत्री ने कहा कि मां भगवती-महादेव के आशीर्वाद और सभी साथियों की दुआ से वे स्वस्थ होकर फिर जनता की सेवा और संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह नया सफर सबके विश्वास-स्नेह के बिना अधूरा था। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जनप्रतिनिधि और पक्ष-विपक्ष के साथियों का धन्यवाद किया। उन्होंने टपकेश्वर में महंत किशनगिरी, पुजारी भरत गिरी से आशीर्वाद भी लिया। इसके बाद मां वैष्णो देवी मंदिर में आचार्य डॉ. विपिन जोशी से मार्गदर्शन प्राप्त किया।



