
महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज सहित 16 से ज्यादा निजी से लेकर सरकारी संस्थान, निगम के करोड़ों के बकायेदार हैं। कर न देने वाले संस्थानों पर निगम की नजर है।
नगर निगम देहरादून को कई सरकारी और निजी संस्थानों से संपत्ति कर नहीं मिल पा रहा है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज और सिडकुल जैसे बड़े संस्थान भी निगम का कर जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। निगम का कहना है कि यदि यह बकाया कर मिल जाए तो शहर में बड़े पैमाने पर विकास कार्य कराए जा सकते हैं।
निगम पिछले कई वर्षों से इन संस्थानों के साथ पत्राचार कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद कर जमा करने में टालमटोल जारी है। वर्तमान में नगर निगम ने वसूली अभियान तेज कर दिया है और बकायेदारों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। नगर निगम ने इस वर्ष 65 करोड़ रुपये से अधिक कर वसूली का लक्ष्य रखा है। इसमें बकाया वसूली के साथ-साथ नई संपत्तियों को कर दायरे में लाना भी शामिल है।
संपत्ति कर ही है निगम की मुख्य आय का जरिया
नगर निगम के पास इस समय सौ वार्डों में रहे करीब 15 लाख लोगों का जिम्मा है। इन लोगों के अच्छी सड़क, पथ प्रकाश व्यवस्था, पार्क और साफ-सुथरा शहर इलाका मिले। कर के इस रुपये से नगर निगम यही विकास कराता है। अगर निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग काम करने वाले संस्थान निगम का कर नियमानुसार नहीं देंगे तो क्या होगा?
53 करोड़ रुपये से ज्यादा कर हुआ जमा, 65 करोड़ का है लक्ष्य
नगर निगम की ओर से 53 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर की वसूली अभी तक की जा चुकी है। यह वसूली 20 प्रतिशत छूट के अलावा है। नगर निगम का लक्ष्य इस वर्ष 65 करोड़ रुपये का है। ऐसे में इस समय नगर निगम की से कर वसूली के लिए पूरी ताकत लगाई हुई है।
इन संस्थानों पर है इतना बकाया
-महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज- 1.8 करोड़
-मैसर्स भूषण फूड्स प्रा. लि. कुआंवाला- 4772895
-रीगल इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी-3446133
-स्पाइस डिजिटल लि.-2768843
-मै. दून वैली लॉजिस्टिक- 2634585
-वन मुख्यालय दिलाराम चौक-23 लाख
-गुरु नानक देव एजुकेशनल सोसायटी-2143117
-मै. लाइफटाइम कन्वेंशन प्रा. लि. 2067357
-नोइंग सोल्यूशन प्रा. लि.2045845
-जैस्मीन, किरण- 1993509
-सरदार भगवान सिंह युनिवर्सिटी गौरव भारती शिक्षा संस्थान-1846937
-माउंट लिटेरा जी स्कूल, -1825391
एसएम प्रोफेशनल सर्विसेस प्रा. लि.-1807320
-सिडकुल-10 लाख









